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Wednesday, June 29, 2022
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हवा का रुख पहचानते हैं बृजेश पाठक! भाजपा में आने के 6 साल में ही बने उपमुख्यमंत्री, ऐसी रहा है सियासी सफर

भाजपा में शामिल होने के 6 साल के बाद ही देश के सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री बन जाना साधारण बात नहीं है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की धमाकेदार जीत के बाद एक बार फिर दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। केशव प्रसाद मौर्या को फिर से डिप्टी सीएम का पद दिया गया है लेकिन इस बार दिनेश शर्मा पर विश्वास नहीं जताया गया। दिनेश शर्मा की जगह सूबे में बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में उभर बृजेश पाठक को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। 

2016 में बसपा से भाजपा में आए थे पाठक
बृजेश पाठक साल 2016 में बसपा से भाजपा में आए थे। उनके सियासी करियर पर नजर डालें तो यह कहा जा सकता है कि उन्हें इस बात का पहले ही पता लग जाता है कि हवा का रुख  किस ओर होने वाला है। उन्होंने अपनी सियासी पारी छात्र नेता के रूप में शुरू की थी। 1990 में वह लखनऊ यूनिवर्सिटी में उपाध्यक्ष चुने गए थे। उस दौरान विनय शंकर तिवारी ने उन्हें पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। दोनों ही अच्छे दोस्त थे। 

तिवारी ने कहा, शायद पाठक ऐसे पहले राजनेता हैं जिन्होंने भाजपा के कई बड़े लोगों को किनारे करते हुए यह मुकाम हासिल किया है जबकि उनका ओरिजिन भाजपा या आरएसएस से नहीं है। विश्वविद्यालय के दिनों को याद करते हुए तिवारी ने कहा, उन दिनों पाठक ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे लेकिन संगठन में उनका काम अच्छा था। उनकी एक क्वालिटी  थी, वह बहुत अच्छे मौसम वैज्ञनिक थे।

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कांग्रेस से शुरू हुई राजनीतिक पारी

विनय तिवारी और पाठक दोनों ने साथ में ही बसपा जॉइन की थी। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले तिवारी सपा में चले गए। बता दें कि बृजेश पाठक कानून के विद्यार्थी रहे हैं। योगी कैबिनेट में वह अब तक कानून मंत्री थे। उनका जन्म 1964 में हरदोई के मल्लावां में हुआ था। पाठक ने 1992 में ही कांग्रेस जॉइन कर ली थी लेकिन उन्हें पहली बार विधानसभा का टिकट 2002 में मिला। वह अपने गृहनगर मल्लावां से ही चुनाव लड़े लेकिन 150 वोटों से हार गए। 

हार के बावजूद राजनीतिक गलियारों में उनकी धमक सुनाई देने लगी थी। इसके बाद हवा का रुख देखते हुए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और बसपा का दाम थाम लिया। ब्राह्मण समीकरण साधने के लिए मायावती ने उन्हें लोकसभा का टिकट दे दिया। पहला चुनाव जीतने के बाद वह बसपा के महासचिव सतीश मिश्रा के बेहद करीब आ गए। इसके बाद मायावती ने 2009 में उन्हें  राज्यसभा भेज दिया और अपना उपनेता बना दिया। हालांकि 2014 में मोदी लहर में वह चुनाव हार गए।

2017 के चुनाव से  पहले भाजपा में आए पाठक
मोदी लहर को देखते हुए बृजेश पाठक 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में आ गए। भाजपा ने उन्हें लखनऊ केंद्रीय सीट से टिकट दे दिया। उन्होंने सपा के बाहुबली नेता रविदास मल्होत्रा को 7 हजार वोट से हराया और पहली बार विधानसभा पहुंचे। योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। 

पिछले पांच साल के दौरान वह काफी सक्रिय रहे और बड़े ब्राह्मण नेता के रूप में पहचान बनाई। वहीं दिनेश शर्मा ब्राह्मण वोटों पर पकड़ बनाने में सफल नहीं रहे। हाल के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लखनऊ कैंट सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के राजू गांधी को 39 हजार से ज्यादा मतों से हराया। 
 

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