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Monday, June 27, 2022
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हमारे रूस और अमेरिका दोनों से अच्छे संबंधः भारत

भारत ने कहा है कि उसके रूस और अमेरिका दोनों से अच्छे संबंध हैं और उनकी अपने आप में अलग-अलग अहमियत है. यूक्रेन युद्ध संबंधी एक सवाल के जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने संसद में यह बात कही.पश्चिमी देशों की ओर से रूस के खिलाफ रुख अपनाने के लिए बढ़ते दबाव के बीच भारत ने कहा है कि उसके रूस और अमेरिका दोनों से दोस्ताना संबंध हैं और उनकी अपनी-अपनी अहमियत है. कई देश चाहते हैं कि यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाए. पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के संबंधों में घनिष्ठता बढ़ी है लेकिन रूस आज भी भारत को हथियार बेचने वाला सबसे बड़ा देश है. यूक्रेन पर हमले के बाद भारत ने रूस की निंदा नहीं की है और एक से ज्यादा बार संयुक्त राष्ट्र में लाए गए रूस विरोधी प्रस्तावों के दौरान मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिसे रूस के समर्थन के तौर पर देखा गया. अमेरिका के करीबी माने जाने वाले देशों में भारत एकमात्र ऐसा बड़ा देश है जो रूस के खिलाफ नहीं है. भारत की विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने संसद में कहा, “भारत ने यूक्रेन में फौरन हिंसा रोकने और विवाद सुलझाने के लिए कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया है. भारत के अमेरिका और रूस दोनों के साथ दोस्ताना और करीबी संबंध हैं.” भारत फिर रहा गैरहाजिर संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत ने रूस के खिलाफ वोट करने से परहेज किया.

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें यूक्रेन के मानवीय संकट के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया गया. भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया. इस प्रस्ताव के पक्ष में 140 मत पड़े जबकि पांच देशों – बेलारूस, सीरिया, उत्तर कोरिया, इरीट्रिया और रूस ने इसके विरोध में मतदान किया. 38 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिनमें चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और क्यूबा शामिल थे. प्रस्ताव में रूस को तुरंत प्रभाव से युद्ध विराम करने की अपील की गई है, ताकि करोड़ों लोगों, घरों, स्कूलों और अस्पतालों को बचाया जा सके. इस प्रस्ताव को यूक्रेन ने पेश किया था. मतदान की स्थिति लगभग 2 मार्च के प्रस्ताव जैसी ही रही. तब 141 देशों ने रूस के खिलाफ मतदान किया था और 5 ने पक्ष में, जबकि भारत समेत 35 देश गैरहाजिर रहे थे. बढ़ रहा है भारत पर दबाव इसी हफ्ते की शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि क्वॉड देशों में भारत ही एक ऐसा देश है जो रूस के खिलाफ कदम उठाने में गड़बड़ा रहा है. इससे पहले भी कई पश्चिमी देश भारत पर रूस के खिलाफ रुख अपनाने के लिए दबाव बना चुके हैं.

पिछले हफ्ते भारत दौरे पर जापान के प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से भारत से कहा था कि वह रूस के खिलाफ कदम उठाए. जापान भी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वॉड का सदस्य देश है. रूस पर पश्चिम के दबाव और अपने हितों के बीच झूल रहा है भारत पिछले हफ्ते ही ब्रिटेन की व्यापार मंत्री ऐन-मरी ट्रेवेलयान ने कहा था कि रूस पर भारत के रुख को लेकर उनका देश बहुत निराश है. भारत के साथ व्यापार वार्ताओं के दूसरे दौर के समापन से पहले ट्रेवेलयान ने यह बात कही. इससे पहले भी ब्रिटेन भारत को रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का आग्रह कर चुका है. जब ब्रिटिश मंत्री ट्रेवेलयान से पूछा गया कि रूस को लेकर भारत के रूख का मुक्त व्यापार समझौते से संबंधित बातचीत पर असर पड़ेगा या नहीं, तो उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अपना रूख बदल लेगा. ट्रेवेलयान ने कहा, “हम बहुत निराश हैं लेकिन हम अपने भारतीय साझीदारों के साथ काम करना जारी रखेंगे और उम्मीद करेंगे कि उनके विचार बदलें.” भारत अडिग है हालांकि भारत लगातार अपने रुख पर कायम है और दुनिया को बहुतायत में यह समझाने में कामयाब रहा है कि उसका रूस के प्रति रुख कैसा है. बीते हफ्ते ऑस्ट्रेलिया ने कहा था किरूस पर भारत के रुख को समझा जा सकता है और इसके लिए कोई भी उससे नाराज नहींहै. लेकिन दुनिया यह भी चाहती है कि भारत की रूस पर निर्भरता कम हो और इसके लिए भारत को मदद की पेशकश भी मिली है.

इसी हफ्ते भारत की यात्रा के बाद के बाद एक अमरिकी राजनयिक ने कहा था कि रूस पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका भारत को सैन्य उपकरण और ऊर्जा की सप्लाई बढ़ाने को तैयार है. राइफल से लेकर रॉकेट तक, भारत की कुल सैन्य जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है. 1990 के दशक में भारत की सेना के ज्यादातर हथियार सोवियत संघ के बनाए हुए ही थे. उसकी थल सेना के पास करीब 70 प्रतिशत, वायु सेना के पास लगभग 80 प्रतिशत और जल सेना के पास करीब 85 प्रतिशत हथियार सोवियत युग के थे. हाल के सालों में भारत ने रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की ओर कई कदम उठाए हैं. उसने अमेरिका, इस्राएल, फ्रांस और इटली से भी हथियार और अन्य सैन्य उपकरण खरीदे हैं. फिर भी, रूस से भारत के रक्षा संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक 2016-20 में भारत के कुल सैन्य आयात का लगभग 49 फीसदी हिस्सा रूस से ही आया था. फ्रांस से 18 प्रतिशत और इस्राएल से उसने 13 प्रतिशत सैन्य आयात किया. वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी).

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