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Monday, January 24, 2022
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रेपिस्ट की मौत की सजा बरकार रखते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने क्यों कहा कि लाखों लोगों की मौत का जिम्मदार हिटलर शाकाहारी था

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु की पुदुकोट्टई जिले में सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के आरोप में 26 साल के व्यक्ति को निचली अदालत की ओर से दी गई मौत की सजा मुहर लगा दी है। जस्टिस एस वैद्यनाथन और जस्टिस जी जयचंद्रन की पीठ सजा पर विचार करते हुए कहा कि हम एक न्यायिक आदेश के माध्यम से एक व्यक्ति के जीवन को लेने के लिए शुरू में थोड़ा हिचकिचाते थे और सजा को आजीवन कारावास में बदलने के बारे में सोचते थे। 

कोर्ट ने कहा, लेकिन मामले की सावधानीपूर्व जांचने परखने के बाद न्यायाधीशों ने जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर कुरान के धार्मिक ग्रंथों, बाइबिल, महाभारत और तमिल भक्ति गायक सेरगाज़ी एस गोविंदराजन के अलावा सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों पर ध्यान दिया और निष्कर्ष निकाला कि यह मृत्यूदंड के सबसे दुर्लभ में से एक था।

कोर्ट ने कहा कि यह उल्लेख करना उचित है कि हर किसी के दिमाग में झूठ, धोखेबाज और पापी होता है, जिसे एक आदमी को उसके बाहर रूप को देखकर नहीं आंका जा सकता है। जैसा कि हिटलर, जिसने लगभग 80 लाख लोगों को फांसी देने का आदेश दिया था और लाखों लोगों और जानवरों की मौत का जिम्मेदार था। जबकि वो एक शाकाहारी था।

यदि ऐसे अभियुक्त जैसे व्यक्ति को इस संसार में जीवित रहने दिया जाता है, तो वह निश्चित रूप से अन्य सह-कैदियों के मन को दूषित करेगा, जो उस जेल से छूटने के कगार पर होंगे जो जेल में बंद हैं। जब मनुष्य की मनोवृत्ति ऐसी हो जाए कि वह ऐसे पशु जैसा हो जाए जिसे अन्य प्राणियों पर कोई दया न हो, तो उसे दण्ड देकर अनन्त लोक में भेज देना चाहिए।

दरअसल, 30 जून 2020 को दोपहर 3 बजे के करीब आरोपी समीवेल उर्फ ​​राजा अनुसूचित जाति समुदाय की लड़की को एक मंदिर में ले गया और फिर एक सुनसान जगह पर यौन शोषण किया। इस डर से कि बच्ची घटना के बारे में लोगों को बता देगी, उसने उसका सिर एक पेड से टकरा दिया और उसके चेहरे और गर्दन और शरीर पर वार करके गांव के एक सूखे तालाब में फेंक दिया। यहीं, नहीं उसने बच्ची के शरीर को पत्तियों और झाड़ियों से ढक दिया। बच्ची का पता नहीं चलने पर पिता ने स्थानीय पुलिस में लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। 

अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपराध को साबित करने के लिए 18 गवाहों को पेश किया, 38 दस्तावेज लगाए और आठ वस्तुओं को साक्ष्य के तौर पर पेश किया। वहीं, आरोपी की तरफ से न तो कोई गवाह पेश किया और न ही उसने कोई दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों का विश्लेषण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई। 

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने अपने आदेश में यह साबित किया है कि यह मामला उन दुर्लभतम मामलों में से एक है, जिनमें मृत्युदंड दिया जा सकता है क्योंकि आजीवन कारावास से कम कोई भी सजा देना अपर्याप्त है और इससे न्याय सुनिश्चित नहीं होगा।

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