- Advertisements -spot_img

Monday, January 24, 2022
spot_img

महाराष्ट्र विधानसभा से विधायकों को निलंबित करने का मामला, SC की टिप्पणी- प्रजातंत्र के लिए यह खतरनाक

महाराष्ट्र विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 विधायकों को सस्पेंड किये जाने के मामले की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट में की गई। इन सभी विधायकों को जुलाई 2021 में एक साल के लिए सस्पेंड किया गया था। मंगलवार को देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि इस तरह के कदम प्रजातंत्र के लिए खतरनाक हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि 6 महीने से ज्यादा किसी संसदीय क्षेत्र को प्रतिनिधित्व से दूर रखने की वारंटी संविधान के द्वारा नहीं दी गई है।

जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, हाउस (विधानसभा) संविधान और मौलिक अधिकारों के तहत चलता है। अगर छह महीने के अंदर किसी पद को भरने का वैधानिक दायित्व है तो इसके आगे कोई भी चीज असंवैधानिक है। विधानसभा से निलंबित किये गये 12 विधायकों ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अदालत में अलग से याचिका दायर की थी। 5 जुलाई, 2021 को विधानसभा स्पीकर ने इस संबंध में प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। अदालत ने इसी मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। 

बेंच में शामिल जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार ने आगे कहा कि ‘अगर हम इस तथ्य को मान भी लें कि हाउस को सस्पेंड करने की ताकत है लेकिन आप किसी क्षेत्र को प्रतिनिधित्व करने से एक साल तक नहीं रोक सकते हैं। अगर कोई सदस्य निष्कासित हो जाता है तो वो वहां खाली स्थान यानी वैकेंसी होती हो जाती है और इसे 6 महीने के अंदर भरा जाना जरूरी है।’

अदालत में निलंबित विधायकों की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, महेश जेठमलानी और सिद्धार्थ भटनागर अपनी दलीलें दे रहे थे। वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि विधायकों को सस्पेंड करने का प्रस्ताव पारित करने के दौरान विधायकों के नैचुरल जस्टिस को अनसुना कर दिया गया। मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाउस के किसी सदस्य को 60 दिनों से ज्यादा के लिए सस्पेंड नहीं किया जा सकता है।

अदालत में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि निलंबित करने की ताकत बिल्कुल सही है और राज्य विधानसभा के इस फैसले में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके नियमों के विपरित व्यवहार के गवाह स्पीकर और सदस्य थे। बेंच ने सुंदरम से कहा, ‘आपकी दलीलें प्रजातंत्र के लिए खतरनाक हैं। पूरी ताकत का मतलब बेलगाम ताकत नहीं होता है। कौन जानता है कि यह प्रयोग के लिए मिसाल बन जाए। आज 12 हैं कल 120 हो सकते हैं। क्या यह संविधान की आधारभूत संरचना पर चोट नहीं है?’ मामले में सुनवाई  अब अगले मंगलवार को होगी।

सस्पेंड विधायकों की सूची

इस सूची में संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भटकलकर, पराग अलावनी, हरीश पिंपले, राम सतपुते, विजय कुमार रावल, योगेश सागर, नारायण कुचे, कीर्तिकुमार बांगड़िया शामिल हैं।

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Related Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Stay Connected

563FansLike
0FollowersFollow
24FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisements -spot_img

Latest Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img