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Wednesday, June 29, 2022
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भाजपा के दो भगवाधारी सीएम, जानिए कितनी मिलती-जुलती है योगी आदित्यनाथ और उमा भारती की कहानी

आज उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं। मध्य प्रदेश की उमा भारती के बाद वो दूसरे भगवाधारी हैं जो जिन्होंने मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली। उमा भारती और योगी आदित्यनाथ के बीच कुछ समानताओं के साथ ढेरों असमानताएं भी हैं। दोनों भगवाधारी तो हैं ही, साथ ही दोनों ने 44 साल की उम्र में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं दोनों की ही छवि फायरब्रांड नेता की रही है। लेकिन जहां योगी आदित्यनाथ आज दूसरी बार यूपी के सीएम पद की शपथ ले रहे हैं, वहीं उमा भारती मात्र साढ़े आठ महीने के लिए मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं।

कुछ ऐसी है दोनों के बीच समानता
दोनों ही भगवाधारी हैं और शादी नहीं की है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दोनों के बीच ढेरों दिलचस्प समानताएं हैं। दोनों ही 44 साल की उम्र में पहली बार मुख्मयंत्री बने। 3 मई 1959 को पैदा हुईं उमा भारती 8 दिसंबर 2003 को एमपी की मुख्यमंत्री बनी थीं। वहीं 5 जून 1972 को पैदा हुए योगी आदित्यनाथ 19 मार्च, 2017 को पहली बार सीएम बने थे। हालांकि उमा भारती केवल साढ़े आठ महीने ही इस कुर्सी पर रही थीं। वहीं योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। 

दोनों ही मास लीडर और अच्छे वक्ता
उमा और योगी आदित्यनाथ दोनों ही मास लीडर और बेहतरीन वक्ता हैं। दोनों जी पशु प्रेमी हैं। उमा भारती गायों और कुत्तों को बेशुमार प्यार करती हैं। कई बार रास्ते में कार रुकवाकर वह गायों को खिलाती नजर आती हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ ने भी गोरखपुर मठ में गौशाला बना रखी है। मुख्यमंत्री बनने से पहले उमा और योगी दोनों पांच बार लोकसभा सदस्य रह चुके थे। जहां उमा अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुकी थीं, वहीं योगी गोरखपुर में 1998 से लगातार सांसदी का चुनाव जीत रहे थे। 

दोनों के बीच अंतर भी कई 
वहीं उमा भारती और योगी आदित्यनाथ के बीच कुछ अंतर भी मौजूद हैं। बात दोनों के पहली बार मुख्यमंत्री बनने की है। एक तरफ उमा को 2003 में उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया था। वहीं यूपी में 2017 के चुनाव में योगी को सीएम फेस घोषित नहीं किया गया था। वहीं सीएम बनने से पहले जहां उमा के पास बतौर केंद्रीय मंत्री कोयला, पर्यटन, मानव संसाधन और युवा मामले और खेल मंत्रालय संभालने का अनुभाव था। वहीं योगी आदित्यनाथ ने महज सांसद के दायित्व निर्वहन किया था और कभी भी राज्य या केंद्र में मंत्री नहीं बने थे। जहां उमा भारती पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की करीबी मानी जाती थीं, वहीं योगी आदित्यनाथ कभी भाजपा के किसी कैंप का हिस्सा नहीं रहे। रामजन्मभूमि आंदोलन के चलते एमपी की सीएम बनने से पहले भी उमा देशभर में जाना-पहचाना चेहरा थीं। वहीं योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने से पहले पहचान एक दिग्गज स्थानीय नेता की थी। 

सत्ता-शासन का रिकॉर्ड
वहीं बात सत्ता-शासन के रिकॉर्ड की करें तो उमा भारती का कार्यकाल काफी विवादास्पद रहा था। विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा उनकी ही पार्टी के लोगों और यहां तक कि खुद उनके भाई स्वामी लोधी ने उमा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। वहीं दूसरी तरफ यूपी का सीएम रहते हुए योगी आदित्यनाथ पर विपक्षी दल भी किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा पाए। उमा भारती गर्म मिजाज की हैं और सरेआम अपने ही मेंटर लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं। अपने इसी स्वभाव के चलते एक बार सीएम पद से हटाए जाने के बाद दोबारा उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। वहीं उमा को पार्टी से निकाला भी जा चुका है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी का गठन किया था। बाद में इसका भाजपा में विलय हो गया। इसके ठीक उलट योगी आदित्यनाथ भाजपा के एक अनुशासित सिपाही माने जाते हैं। कभी भी उनके किसी से मनमुटाव और असंतोष की खबर कभी सामने नहीं आई। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा सभी से बढ़िया तालमेल है।

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