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Thursday, January 27, 2022
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तमिलनाडु: कोविड प्रतिबंधों के साथ ‘जल्लीकट्टू’ की इजाजत, टीकाकरण, नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी

कोविड-19 संक्रमण बढ़ने के बीच, तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को ‘जल्लीकट्टू’ कार्यक्रम की अनुमति दे दी। बता दें कि जल्‍लीकट्टू (Jallikattu) तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों का एक परंपरागत खेल है जो पोंगल त्यौहार पर आयोजित कराया जाता है। इसमें बैलों से इंसानों की लड़ाई होती है। हालांकि सरकार ने पिछली बार की तरह इस बार भी राज्य भर में दर्शकों की संख्या और अनिवार्य टीकाकरण सहित कई प्रतिबंधों के साथ ‘जल्लीकट्टू’ कार्यक्रम की अनुमति दी है।

‘जल्लीकट्टू’ को लेकर क्या हैं नियम

राज्य सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SoPs) के मुताबिक, केवल दो लोगों – बैल के मालिक और एक सहायक – को प्रत्येक बैल के साथ अखाड़े के अंदर जाने की अनुमति होगी। साथ ही, जिला प्रशासन दो लोगों को पहचान पत्र प्रदान करेगा और बिना कार्ड वालों को रिंग के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रतिभागियों के लिए पूर्ण टीकाकरण अनिवार्य होगा। इसके अलावा 48 घंटे से अधिक पुरानी नेगेटिव आरटी पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं होगी। 

जहां 300 खिलाड़ियों को ‘जल्लीकट्टू’ में भाग लेने की अनुमति है, वहीं 150 खिलाड़ियों को बुल रेसिंग स्पोर्ट में भाग लेने की अनुमति दी गई है, जिसे तमिल में ‘एरुथु विदुथल’ कहा जाता है। साथ ही, जो अधिकारी तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं, खेल के आयोजकों और दर्शकों को भी पूरी तरह से टीका लगाया जाना चाहिए और एक नेगेटिव रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। दर्शकों के लिए भी अधिकतम उपस्थिति की सीमा तय की गई है। या तो खुले मैदान की बैठने की क्षमता का 50%, जहां खेल होता है, या अधिकतम 150 दर्शकों, जो भी कम हो, की अनुमति दी गई है।

खेल के आयोजन स्थल के अलावा अन्य शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों को टेलीविजन या ऑनलाइन के माध्यम से कार्यक्रम देखने की सलाह दी गई है। सरकार ने कहा कि राज्य से पूर्व अनुमति और पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम और कोविड एसओपी के अनुपालन में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए।

कहा जाता है खूनी खेल

तमिलनाडु में हर साल इस खूनी खेल में कई लोग बुरी तरह घायल होते हैं और कई लोगों की जानें भी जाती हैं। जानवरों से जुड़ी संस्था पेटा इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई थी। अदालत ने 2014 में इस खेल पर पाबंदी लगाने का फैसला सुनाया था लेकिन एनडीए सरकार ने 2016 में फिर से इसे अनुमति दे दी। 

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