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Thursday, June 30, 2022
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चीन के विदेश मंत्री पहुंचे भारत

दो साल से चल रहे भारत-चीन सीमा गतिरोध के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी बिना किसी आधिकारिक घोषणा के भारत पहुंचे हैं. यह गतिरोध शुरू होने के बाद दोनों देश के बीच पहली उच्च स्तरीय यात्रा है.वांग यी नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिले. दोनों के बीच बातचीत के एजेंडा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. उम्मीद की जा रही है कि जयशंकर बाद में बातचीत पर बयान देंगे. मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि जयशंकर से मिलने से पहले यी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी मिले.

वांग यी 24 मार्च देर शाम नई दिल्ली पहुंचे. भारत सरकार ने उनकी यात्रा से संबंधित कोई घोषणा नहीं की थी. कई पत्रकारों ने ट्विट्टर पर लिखा कि वो वांग यी के विमान को ट्रैक कर उनके भारत पहुंचने की पुष्टि कर पाए. नई दिल्ली पहुंचने के पहले उन्होंने एक दिन काबुल में बिताया और उससे एक दिन पहले वो इस्लामाबाद में थे. (पढ़ें: नई राह पकड़ सकते हैं भारत-चीन संबंध) दो साल से जारी गतिरोध भारत में उनकी बैठकों में दो साल से लद्दाख में दोनों देशों के बीच सीमा पर चल रहे सैन्य गतिरोध और यूक्रेन युद्ध पर बातचीत हो सकती है.

मई और जून 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर कई इलाकों पर झड़प हुई थी. 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक मुठभेड़ हुई जिसमें भारतीय सेना के कम से 20 सिपाही मारे गए. चीन ने आजतक नहीं बताया है कि उसके कितने सैनिक उस मुठभेड़ में मारे गए थे या घायल हुए थे. इस घटना के बाद जल्द ही दोनों देशों ने सीमा के कई बिंदुओं पर भारी संख्या में सेना तैनात कर दी और दोनों देश लगभग युद्ध के मुहाने तक पहुंच गए. लेकिन युद्ध होने नहीं दिया गया और कुछ हफ्तों बाद दोनों देश के बीच सैन्य कमांडर स्तर पर बातचीत शुरू हुई. (पढ़ें: नए साल की शुरुआत गलवान घाटी पर नए विवाद से) धीरे-धीरे सीमा पर कई बिंदुओं पर गतिरोध खत्म हुआ और सेनाएं पीछे हट गईं. लेकिन गतिरोध अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और कम से कम दो बिंदुओं पर अभी भी सेनाएं आमने सामने डटी हुई हैं. दो सालों में यह पहली बार है जब दोनों देशों का कोई उच्च अधिकारी दूसरे देश की यात्रा पर गया है. भारत पहुंचने से पहले इस्लामाबाद में यी द्वारा कश्मीर पर दिए गए बयान पर विवाद छिड़ गया था, जिसकी प्रतिक्रिया में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि “भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से संबंधित सभी मामले भारत के अंदरूनी मामले हैं. चीन समेत किसी भी देश को इन पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है”

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