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Thursday, January 27, 2022
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खुफिया तंत्र की खामी को दूर करने की कवायद, कारगिल युद्ध के बाद तैयार ग्रिड की मदद लेने की तैयारी

केंद्र चाहता है कि राज्य मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) के माध्यम से अधिक और सटीक खुफिया जानकारी साझा करें। कुछ राज्यों से कई बार जानकारी साझा करने में संकोच किया जाता है। एमएसी मैक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के तहत आतंकवाद विरोधी ग्रिड है, जिसे 2001 में कारगिल युद्ध के बाद शुरू किया गया था। इसमें केंद्र और राज्यों की एजेंसियां सूचनाएं साझा करती हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठा था। बैठक में पुलिस महानिदेशकों से मैक के माध्यम से पर्याप्त जानकारी और कार्रवाई योग्य इनपुट साझा करने को कहा गया था। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), सशस्त्र बल और राज्य पुलिस सहित 28 संगठन मैक का हिस्सा हैं। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां ​​मैक पर रीयल-टाइम इंटेलिजेंस इनपुट साझा करती हैं। इस सिस्टम को जिला स्तर तक जोड़ने की योजना काफी समय से चल रही है।

मैक पर जानकारी साझा करने से हिचकते हैं राज्य
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हालांकि यह प्रणाली विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने के लिए है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में कई रुकावट भी सामने आए हैं। राज्य अक्सर मैक पर जानकारी साझा करने से हिचकते हैं। महत्वपूर्ण जानकारी को सही समय पर साझा करने में कई कमियां पाई गई हैं। माना जा रहा है कि गृह मंत्री की बैठक के बाद अब इस मामले में गति आ सकती है। मैक मुख्यालय से लगभग 400 सुरक्षित साइटें जुड़ी हुई हैं। मालूम हो कि राज्यों की ओर से सूचना साझा करने में अनिच्छा को 2020 में एक संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी बताया गया था। मैक में प्राप्त कुल इनपुट में राज्य एजेंसियों का योगदान कम है।

एसएमएसी की कनेक्टिविटी का विस्तार करने पर विचार
आईबी ने समिति को सूचित किया था कि आतंकवाद विरोधी प्रयासों में किसी भी तरह से शामिल सभी संगठन इस केंद्र के सदस्य हैं। सभी राज्यों के पास राज्यों की राजधानियों में स्थित एक सहायक बहु-एजेंसी केंद्र (एसएमएसी) है। आईबी ने पैनल को सूचित किया था कि गृह मंत्रालय, आईबी के साथ जिलों में एसएमएसी की कनेक्टिविटी का विस्तार करने पर विचार कर रहा है। केंद्र चाहता है कि खुफिया सूचनाओं को सटीक बनाया जाए। इनको रियल टाइम साझा करने के साथ ही एजेंसियां इनपुट का साझा विश्लेषण करके कार्रवाई योग्य बिंदुओं पर सहयोग करें। मौजूदा चुनौतियों के मद्देनजर खुफिया तंत्र में किसी भी स्तर पर खामी को दुरुस्त करने को कहा गया है।

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