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Tuesday, August 9, 2022
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Vice President Election: जगदीप धनखड़ के पैतृक गांव में खुशियों का माहौल, सीएम गहलोत ने दी बधाई

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में आज खुशी का माहौल है। ग्रामीण एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। दरअसल आज उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने जीत दर्ज की है। उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा को हराया है। उनकी इस जीत के बाद धनखड़ के पैतृक गांव किठाना में जश्न का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बना हुआ है। जगदीप धनखड़ के पैतृक गांव में जीत की सूचना मिलने के साथ ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। झुंझुनूं के किठाना गांव में जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है। महिलाएं सुबह से ही मंगल गीत गा रही हैं। साथ ही नृत्य भी कर रही हैं। जगदीप धनखड़ के भतीजे हीरेंद्र धनखड़ ने कहा कि जीत को लेकर हम सभी सुबह से ही आश्वस्त थे। गांव में सुबह से पूजा-पाठ आदि हो रहा है। 

सीएम गहलोत और वसुंधरा राजे ने बधाई दी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उपराष्ट्रपति का चुनाव जीतने पर जगदीप धनखड़ को बधाई दी है। सीएम गहलोत ने ट्वीट कर लिखा- जगदीप धनखड़ के भारत के उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। धनखड़ राजस्थान से भैरोसिंह शेखावत के बाद दूसरे उपराष्ट्रपति बने हैं। इस बात का राजस्थानियों को प्रसन्नता है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर लिखा- किसान पुत्र  शेखावाटी की शान एवं कुशल विविवेत्ता जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने पर हार्दिक शुभकामनाएं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप उपराष्ट्रपति पद की गरिमा और सम्मान को सर्वोच्च रखते हुए राष्ट्रसेवा में अपना दायित्व कुशलतापूर्व निर्वहन करेंगे।

जगदीप धनखड़ का वकालत से हुआ सफर शुरू

जगदीप धनखड़ ने 1979 में वकालत की शुरुआत की, लेकिन 35 साल की उम्र में हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष बने. वहीं सबसे युवा सीनियर एडवोकेट नामित होने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। 1990 में वे वरिष्ठ अधिवक्ता हो गए थे और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य भी निर्वाचित हुए. वकालत के पेशे में धनखड़ के जूनियर रहे कई अधिवक्ता आज बड़े पदों पर हैं। इनमें जस्टिस आरएस चौहान मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर हुए. वहीं, जस्टिस एसपी शर्मा पटना हाईकोर्ट में जज हैं वे भी धनखड़ के जूनियर रहे। धनखड़ ने अपनी राजनीति की शुरुआत जनता दल से की थी। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय बैठक भी धनखड़ के गृह जिले झुंझुनू में हुई थी। अपने समय के अधिकांश जाट नेताओं की तरह धनखड़ भी मूल रूप से देवीलाल से जुड़े हुए थे। युवा वकील रहे धनखड़ का राजनीतिक सफर तब आगे बढ़ना शुरू हुआ, जब देवीलाल ने उन्हें 1989 में कांग्रेस का गढ़ रहे झुंझुनू संसदीय क्षेत्र से विपक्षी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा और वहां उन्होंने जीत भी दर्ज की। धनखड़ 1989 में झुंझुनू से सांसद बने। पहली बार सांसद चुने जाने पर ही उन्हें बड़ा इनाम मिला। 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था।

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