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Thursday, January 27, 2022
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PM मोदी की सुरक्षा में चूक का जिम्मेदार कौन? कमेटी ने पंजाब DGP सहित 13 अधिकारियों को किया तलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच जनवरी को पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में भारी चूक हुई थी। इसकी जांच को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। कमेटी ने आज यानी शुक्रवार को पंजाब पुलिस प्रमुख (डीजीपी) एस चट्टोपाध्याय सहति 13 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।

कमेटी ने जिन अधिकारियों को तलब किया है उनमें डीजीपी चट्टोपाध्याय के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) जी नागेश्वर राव, एडीजीपी जितेंद्र जैन, पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) पटियाला मुखविंदर सिंह चिन्ना, फिरोजपुर उप महानिरीक्षक इंद्रबीर सिंह, फरीदकोट के डीआईजी सुरजीत सिंह का नाम शामिल है। फिरोजपुर के उपायुक्त दविंदर सिंह, फिरोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरमनदीप हंस, मोगा के एसएसपी चरणजीत सिंह सोहल, कोटकपूरा के ड्यूटी मजिस्ट्रेट वरिंदर सिंह, लुधियाना के संयुक्त आयुक्त अंकुर महेंद्रू, बठिंडा के उपायुक्त एएसपी संधू, बठिंडा के एसएसपी अजय मलूजा और फिरोजपुर वीवीआईपी नियंत्रण कक्ष प्रभारी का भी नाम उन 13 लोगों में शामिल है।

पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी द्वारा भेजे गए विज्ञप्ति में कहा गया है, “आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त विषय के संदर्भ में संबंधित आदेशों / दस्तावेजों / अभिलेखों के साथ 7 जनवरी को सुबह 10 बजे बीएसएफ कैंपस फिरोजपुर में कमेटी से मुलाकात करें।”

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा घोषित समिति सुरक्षा व्यवस्था में “गंभीर चूक” की जांच करेगी, जिसने वीवीआईपी को “गंभीर जोखिम” में डाल दिया था।

पैनल का नेतृत्व कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) सुधीर कुमार सक्सेना कर रहे हैं। इसके अन्य सदस्य इंटेलिजेंस ब्यूरो के संयुक्त निदेशक बलबीर सिंह और विशेष सुरक्षा समूह आईजी एस सुरेश हैं।

केंद्र ने इसे बड़ी सुरक्षा चूक के रूप में वर्णित किया है। फिरोजपुर में कृषि प्रदर्शनकारियों द्वारा नाकेबंदी के कारण मोदी का काफिला बुधवार को एक फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक फंसा रहा। वह भाजपा की रैली सहित अन्य कार्यक्रम में शामिल हुए बिना पंजाब से दिल्ली लौट आए। केंद्र ने पंजाब में कांग्रेस सरकार को सुरक्षा उल्लंघन के लिए दोषी ठहराया है।

हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने दावा किया कि पीएम मोदी द्वारा यात्रा योजनाओं में अंतिम समय में बदलाव के कारण यह स्थिति पैदा हुई। गुरुवार को चन्नी की सरकार ने जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल और प्रमुख सचिव, गृह मामलों और न्याय, अनुराग वर्मा की एक समिति का गठन किया। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

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