- Advertisements -spot_img

Friday, December 2, 2022
spot_img

Gujarat Elections: गुजरात में भाजपा के सामने ये पांच बड़ी चुनौतियां, कैसे पार लगेगी नैया?

गुजरात में लगातार सातवीं बार सत्ता पर काबिज BJP तमाम  चुनौतियों से जूझ रही है। विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के लिए गुजरात की लड़ाई इस बार साल 2017 की तुलना में भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। ऐसा तब है जब 2017 के चुनावों के मुकाबले भाजपा के सामने कोई मजबूत अशांति नहीं है। पिछले चुनावों में भाजपा को किसानों के मुद्दे, जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी और पाटीदार आंदोलन जैसी तमाम चुनौतियों से जूझना पड़ा था। साल 2017 में लगभग 70 फीसदी मतदान हुआ था, तब पाटीदार जैसा समुदाय, जो कभी भाजपा का मजबूत वोट-बैंक था, बड़ी संख्या में सामने आकर भाजपा के खिलाफ मतदान किया था। प्रस्तुत है भाजपा के लिए इस बार की चुनौतियों पर एक रिपोर्ट… 

भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में AAP
आम आदमी पार्टी की एंट्री के चलते गुजरात की कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो चला है। गुजरात के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों भाजपा के लिए गढ़ रहे हैं। इनमें आम आदमी पार्टी सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 84 या तो अर्ध-शहरी या शहरी प्रकृति की सीटें हैं, जबकि 98 ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र हैं। आम आदमी पार्टी ने मुफ्त बिजली, बेरोजगारों और महिलाओं को मासिक वजीफा और मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और मुफ्त शिक्षा की पेशकश करके लोकप्रियता हासिल की है।

एंटी इनकंबेंसी कम करने की कवायद कितनी कारगर 
भाजपा ने इस बार लंबे समय से चली आ रही एंटी इनकंबेंसी को थामने के लिए अधिकांश दिग्गजों के टिकट काट दिए हैं। भाजपा ने इस बार कुल 182 में से 42 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। सनद रहे भाजपा ने वर्षों की सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए अपने मुख्यमंत्री रूपाणी समेत पूरे मंत्रिमंडल को बदल दिया था। अब पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, पूर्व शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा और पूर्व ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल समेत कई बड़े नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। 

बागियों की चुनौती से पार पाना मुश्किल
एंटी इनकंबेंसी से पार पाने के लिए जिन नेताओं के टिकट काटे गए हैं, उनमें से कई ने बगावत कर दी है। यही कारण है कि भाजपा को इस बार बागियों की तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश भाजपा के दिग्गजों ने पहले तो मान-मनौवल के फॉर्मूले पर काम किया लेकिन जिन क्षेत्रों में बात नहीं बनी वहां पार्टी की ओर से सख्त कार्रवाई की गई है। नतीजतन भाजपा 18 नेताओं को निलंबित कर चुकी है। इनमें 17 नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में नामांकन दाखिल किया था जबकि एक ने टिकट नहीं मिलने के बाद कांग्रेस के पक्ष में आवाज बुलंद की थी। 

पहले चरण की चुनौती
निलंबित किए गए सात नेताओं में से दो हर्षद वसावा और अरविंद लाडानी नंदोद और केशोद सीटों से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। हर्षद वसावा एक आदिवासी नेता हैं जबकि अरविंद लाडानी भाजपा के पूर्व विधायक हैं। एक अन्य नेता छत्रसिंह गुंजारिया, जिन्हें भाजपा ने निलंबित किया है, सुरेंद्रनगर जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्य हैं। उन्हें कांग्रेस ने धांगधरा सीट से उतारा है। पहले चरण के चुनाव में कुल छह नेता भाजपा के लिए चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Related Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Stay Connected

563FansLike
0FollowersFollow
22FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisements -spot_img

Latest Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img