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Friday, December 2, 2022
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ED निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक साल बढ़ा, कई हाई प्रोफाइल मामलों की कर रहे जांच

केंद्र सरकार ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को एक और साल के लिए बढ़ा दिया। इसे अधिकारियों ने एजेंसी में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कदम बताया, ताकि कई महत्वपूर्ण मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को आखिर तक ले जाया जा सके। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने ईडी में प्रवर्तन निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा के विस्तार को 18 नवंबर से आगे एक वर्ष की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है।

ईडी प्रमुख के रूप में मिश्रा का यह तीसरा विस्तार है और वह अब एजेंसी के प्रमुख के रूप में पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। वह मूल रूप से साल 2020 में ही रिटायर्ड हो गए थे, लेकिन एक-एक करके उन्हें दो बार सेवा विस्तार दिया गया। सरकार, नवंबर 2021 में, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) अधिनियम के साथ-साथ दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश लाई, ताकि ED प्रमुख और CBI निदेशक को तीन बार एक साल का विस्तार दिया जा सके। इसे एक महीने बाद संसद द्वारा पारित किया गया था।

मिश्रा को पहली बार 19 नवंबर, 2018 को एक आदेश द्वारा दो साल की अवधि के लिए ईडी निदेशक नियुक्त किया गया था। उन्हें नवंबर, 2020 में पद छोड़ना था, लेकिन इसके बाद उन्हें सेवा विस्तार दिया गया और कार्यकाल तीन साल का हो गया। उनके कार्यकाल में यस बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राणा कपूर, आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर, कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स सहित कई हाई प्रोफाइल व्यक्तियों पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया। कथित बिचौलियों सुशेन मोहन गुप्ता और राजीव सक्सेना, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को गिरफ्तार किया गया।

वहीं, केंद्र सरकार ने इस साल जुलाई में संसद को बताया है कि ईडी ने एनडीए सरकार के बनने के बाद से पिछले आठ वर्षों के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 3,010 छापे मारे और 99,536 करोड़ रुपये के अपराध की आय को कुर्क किया। यूपीए के कार्यकाल में 2004-05 से 2013-14 के बीच केवल 112 छापे और सिर्फ 5,346 करोड़ रुपये की आय की कुर्की की गई थी। इसी तरह, 2004-05 और 2013-14 के बीच संघीय एजेंसी द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के लिए केवल 8,586 जांच की गई, यह संख्या पिछले आठ वर्षों में बढ़कर 22,320 फेमा मामलों तक पहुंच गई।

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