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Saturday, October 1, 2022
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18 से 65 साल तक के रूसी पुरुषों के देश छोड़ने पर रोक, लग सकता है मॉर्शल लॉ

व्लादिमीर पुतिन के आर्थिक लामबंदी के ऐलान का असर यूक्रेन और पश्चिमी देशों में पड़े या नहीं ये भविष्य की बात है लेकिन, रूस में दिखने लगा है। पुतिन की घोषणा सुन डरे रूसी लोग देश छोड़ रहे हैं। रूस से बाहर जाने वाली सभी उड़ाने लगभग पूरी तरह से बुक हो चुकी हैं। इस बीच ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई है कि रूसी एयरलाइंस ने 18 से 65 साल के बीच की उम्र के पुरुषों के लिए टिकट बुक पर रोक लगा दी है। एयरलाइंस को डर है कि देश में कभी भी मार्शल लॉ लगाया जा सकता है। दरअसल, पुतिन ने आर्थिक लामबंदी पर हस्ताक्षर करके ऐलान कर दिया है कि रिजर्विस्ट यानी आरक्षित सैनिकों की तैनाती की जाएगी।

रूस से बाहर जाने वाली उड़ानें लगभग पूरी तरह से बुक हो गई हैं। रूस की लोकप्रिय वेबसाइट एविएलेस के अनुसार, आर्मेनिया, जॉर्जिया, अजरबैजान और कजाकिस्तान के आसपास के देशों के शहरों के लिए सीधी उड़ानें बुधवार तक बिक गईं। टर्किश एयरलाइंस ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि इस्तांबुल के लिए उड़ानें, जो रूस से आने-जाने का एक महत्वपूर्ण यात्रा केंद्र है, शनिवार तक एडवांस बुकिंग हो चुकी है। 

कई समाचार आउटलेट और पत्रकारों ने ट्विटर पर कहा कि रूसी एयरलाइंस ने 18 से 65 (रूसी सरकार के मुताबिक, युद्ध में हिस्सा लेने वालों की उम्र) के बीच पुरुषों को टिकट बेचना बंद कर दिया है, इस डर से कि मार्शल लॉ लगाया जा सकता है। फॉर्च्यून ने एक रिपोर्ट में कहा है कि रूस के रक्षा मंत्रालय से मंजूरी हासिल करने वाले युवाओं को ही देश छोड़ने की अनुमति होगी।

लुहान्स्क समेत कई प्रांतों में वोटिंग
आउटलेट ने आगे कहा कि ऐसी भी संभावना है कि इस सप्ताह के अंत में लुहान्स्क और डोनेट्स्क प्रांतों में जनमत संग्रह आयोजित किया जाएगा ताकि पुतिन को यूक्रेन के उन हिस्सों को आधिकारिक रूप से जोड़ने और इसे आधिकारिक रूसी क्षेत्र बनाने का अवसर मिल सके। बुधवार को पुतिन के संबोधन के बाद, रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने दावा किया कि 3 लाख पुरुषों को सेवा के लिए बुलाया जा सकता है।

यूक्रेन से युद्ध में पश्चिमी देशों तक पर निशाना
रूस का यूक्रेन में “विशेष सैन्य अभियान”, जो छह महीने से अधिक समय से चल रहा है, इसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। लेकिन पुतिन अभी भी युद्ध रोकने से इनकार कर रहे हैं, यहां तक ​​कि पश्चिम पर “ब्लैकमेल और डराने-धमकाने” का आरोप भी लगा रहे हैं।

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