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Thursday, January 27, 2022
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1.2 अरब डॉलर का राहत पैकेज, डूब रही श्रीलंका की इकोनॉमी को मिलेगा सहारा?

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। श्रीलंका में महंगाई अपने चरम पर है तो वहीं विदेशी मुद्रा भंडार भी लगभग खाली हो चुका है। इन बुरी परिस्थितियों में श्रीलंका सरकार ने 1.2 अरब डॉलर के आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की है। बहरहाल, आइए जानते हैं कि श्रीलंका पर ये संकट क्यों आया है और इससे निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है।

श्रीलंका के संकट की वजह: श्रीलंका के आर्थिक संकट की सबसे बड़ी वजह विदेशी कर्ज है। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के छोटे भाई बेसिल राजपक्षे ने कहा, ‘‘हम पर तीन देशों–चीन, जापान और भारत का बहुत अधिक कर्ज है। इस साल के लिए कुल बकाया 6.9 अरब अमेरिकी डॉलर होगा।’’ बेसिल राजपक्षे के मुताबिक हमें जुलाई में 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर डालर चुकाने हैं। चीन का कर्ज श्रीलंका पर सबसे ज्यादा है। चीन इस मौके का फायदा उठाकर श्रीलंका में अपने मनमुताबिक विस्तार कर रहा है। 

विदेशी मुद्रा भंडार का संकट: श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा भंडार भी एक बड़ा संकट है। नवंबर 2021 के अंत तक श्रीलंका के पास सिर्फ 1.58 बिलियन डॉलर का विदेशी भंडार था, जो 2019 में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के पदभार संभालने के समय 7.5 बिलियन डॉलर था। सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए कई कदम भी उठाए। मसलन, पिछले साल मार्च में सरकार ने व्यापक आयात प्रतिबंध लगाया था जिससे फ्यूल और चीनी जैसे जरूरी सामानों की कमी हो गई थी। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए तीन विदेशी राजनयिक मिशनों को बंद करने की घोषणा कर दी है।

श्रीलंका की सरकार ने भारत के केंद्रीय रिजर्व बैंक से भी मदद ली। रिजर्व बैंक ने श्रीलंका के साथ कई बार विदेशी मुद्रा अदला-बदली की। आपको बता दें कि विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की इकोनॉमी के ट्रेड के लिए बड़ा सहारा होती है। 

कोरोना भी बड़ा फैक्टर: श्रीलंका की इकोनॉमी को तबाह करने में कोरोना की भी बड़ी भूमिका रही। कोरोना की वजह से श्रीलंका का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हुआ, जो देश की इकोनॉमी का सबसे बड़ा सहारा है। दरअसल, श्रीलंका में टूरिज्म के जरिए सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार मिलता है। कोरोना काल में हालात बदल गए और सबकुछ ठप हो गया। इस वजह से संकट और बढ़ गया। इसके अलावा, दूसरे सेक्टर्स पर भी तालाबंदी का असर दिखा और कंपनियां कर्ज के बोझ में डूब गईं।

सरकार का आश्वासन: श्रीलंका की सरकार हालात के सुधरने की बात कह रही है। इसके साथ ही श्रीलंका के वित्त मंत्री बेसिल राजपक्षे ने दावा किया है कि देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्ज डिफॉल्ट नहीं करेगा।  हालांकि, रेटिंग एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि श्रीलंका अपने ऋण दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ है।

वित्त मंत्री के मुताबिक नए आर्थिक राहत पैकेज के तहत 229 अरब श्रीलंकाई रुपये (1.2 अरब अमेरिकी डॉलर) खर्च किए जाएंगे, जिसमें अन्य उपायों के अलावा जनवरी 2022 से 15 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और विकलांग सैनिकों को प्रति माह 5,000 रुपये (24 अमेरिकी डॉलर) का विशेष भत्ता शामिल है।

किसानों को सहारा: राजपक्षे के मुताबिक इस फसल कटाई के मौसम में पैदावार में लगभग 25 से 30 प्रतिशत की कमी का सामना करने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। राजपक्षे का दावा है कि राहत पैकेज से महंगाई नहीं बढ़ेगी, क्योंकि सारा खर्च बजट के भीतर होगा। उन्होंने यह भरोसा भी दिया है कि कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा। मतलब ये कि आम लोगों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा। सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत पैकेज की मांग पर भी मंथन कर रही है।

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