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Saturday, October 1, 2022
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'यूक्रेन युद्ध गंभीर चिंता का विषय, बातचीत के रास्ते पर लौटो', सुरक्षा परिषद में भारत का कड़ा संदेश

भारत ने एक बार फिर से यूक्रेन युद्ध को लेकर सुरक्षा परिषद में कड़ा संदेश दिया। दरअसल हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नए सिरे से सैनिकों को इकट्ठा करने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने देश की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से भी न झिझकने की घोषणा की थी। इस ताजा घटनाक्रम के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को भारत ने यूक्रेन में शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करना और बातचीत के रास्ते पर लौटना ही समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भारत सभी टकरावों को तत्काल समाप्त करने और बातचीत व कूटनीति की वापसी की आवश्यकता को दृढ़ता से दोहराता है।

यूक्रेन को लेकर यूएनएससी ब्रीफिंग में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष का लंबा खिंचना पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की वजह से दुनिया ने महंगाई, खाद्यान्नों, उर्वरकों और ईंधन की भारी कमी देखी है। उन्होंने कहा, “यह परिषद कूटनीति का सबसे शक्तिशाली प्रतीक है। इसे अपने उद्देश्य पर खरा उतरते रहना चाहिए।” इस दौरान जयशंकर ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की टिप्पणी को भी दोहराया। ज्ञात हो कि एससीओ समिट से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “यह युद्ध का युग नहीं है।” 

यूक्रेन ‘दंड माफी के खिलाफ लड़ाई’ विषय पर 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र परिषद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘‘यूक्रेन युद्ध की दिशा पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गभीर चिंता का विषय है। भविष्य के अनुमान और ज्यादा परेशान करने वाले दिख रहे हैं। परमाणु मुद्दा खास तौर पर चिंताजनक है।’’ यूरोप और विदेश मामलों की फ्रांसीसी मंत्री कैथरीन कोलोना की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को यह चर्चा हुई। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र मे भाग लेने के लिए दुनिया भर के नेता संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्र हैं।

परिषद की इस चर्चा को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस, अमेरिका के विदेश मंत्री एटनी ब्लिंकेन, चीन के विदेश मंत्री वांग यि, रूस के विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव और ब्रिटेन के विदेश मंत्री, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के मंत्री, जेम्स क्लेवेर्ली और सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने संबोधित किया। जयशंकर ने परिषद को बताया कि वैश्विकरण के इस दौर में युद्ध का प्रभाव सुदूर क्षेत्रों में भी महसूस होने लगा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी ने कीमतों में वृद्धि, खाद्यान्न, उर्वरक और ईधन की कमी महसूस करनी शुरू कर दी है।’’ उन्होंने कहा कि खास तौर से विश्व के दक्षिणी हिस्से का ज्यादा परेशानी हो रही है।

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