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Thursday, June 30, 2022
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मुस्कान के साथ कुछ कहा जाए तो कोई अपराध नहीं… दिल्ली दंगों से पहले हेट स्पीच पर बोला हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर आप मुस्कान के साथ कुछ कह रहे हैं, तो कोई अपराध नहीं है। लेकिन अगर कुछ आपत्तिजनक बात कही जाए तो अपराध हो सकता है। पीठ ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ हेट स्पीच के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा। पीठ ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

एकल-न्यायाधीश पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने दिल्ली दंगों पर हुई हेट स्पीच पर सुननाई की। उन्होंने कहा कि अक्सर चुनावों में दिए गए राजनीतिक भाषण आम दिनों में हुए भाषणों से थोड़ा अलग होते हैं। इसलिए इन पर प्राथमिकी दर्ज करने से पहले “चेक एंड बैलेंस” की आवश्यकता होती है। बताते चलें कि सीपीआई नेता वृंदा करात द्वारा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा सांसद परवेश वर्मा के खिलाफ हेट स्पीच को लेकर याचिका दायर की थी, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है, निचली अदालत ने आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया गया था, जो 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से ठीक पहले दिए गए दिए गए थे।

क्या कहा था अनुराग ठाकुर ने
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने भाषण में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए समर्थकों से आह्वान करते हुए “देश के गद्दारो को, गोली मारो सालो को” के नारे का इस्तेमाल किया था। चुनाव आयोग ने 29 जनवरी 2020 को भाषण के लिए ठाकुर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। करात ने निचली अदालत के समक्ष अपनी शिकायत में अभद्र भाषा के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। अब करात ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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जस्टिस सिंह ने टिप्पणी की कि चुनावी भाषण और अन्य समय में दिए गए भाषणों में अंतर होता है, “क्योंकि अगर चुनाव के समय कोई भाषण दिया जाता है, तो वह एक अलग समय होता है। यदि आप सामान्य समय में भाषण दे रहे हैं, तो आप भड़का रहे हैं।”

पीठ ने कहा, “चुनावी भाषण में, राजनेताओं द्वारा एक-दूसरे से बहुत सी बातें कही जाती हैं और वह भी गलत बात है। लेकिन मुझे अधिनियम की आपराधिकता को देखना होगा यदि आप कुछ कह रहे हैं, मान लीजिए कि आपने केवल महौल और इन सभी चीजों के लिए कुछ कहा है।”

सुनवाई के दौरान वृंदा करात के वकील अदित पुजारी और तारा नरूला ने अपनी दलीलों में कहा था कि भाषणों ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा को भड़काया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मंत्री द्वारा “ये लोग” शब्द के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि वह प्रदर्शनकारियों और एक विशेष समुदाय को निशाना बना रहे थे।

इस पर जज ने पूछा, ‘भाषण में सांप्रदायिक मंशा कहां है कि प्रदर्शनकारी सभी एक समुदाय के हैं। बेंच ने पूछा, “अगर उस आंदोलन को इस देश के अन्य सभी नागरिकों द्वारा समर्थित किया जाता है, तो आप कैसे कह सकते हैं कि ऐसा बयान दो नेताओं द्वारा केवल एक ही समुदाय के लिए कहा गया है?” पीठ ने अपील पर अपना फैसला फिलहाल के लिए सुरक्षित रख लिया है।

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