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Sunday, November 27, 2022
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बाजवा हो रहे रिटायर, पाक को मिलेगा नया सेना प्रमुख; भारत के लिए क्या हैं मायने?

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के रिटायर होने के बाद इसी महीने नया आर्मी चीफ मिल सकता है। भारत समेत दुनियाभर के कई देशों की निगाहें इसपर टिकी हैं। पड़ोसी देश के लिए आर्मी चीफ की नियुक्त बहुत मायने रखती है। इसका कारण यह है कि यहां राजनीति और प्रशासन में भी सेना का बड़ा दखल रहता है। 75 साल के इतिहास में यहां 36 साल तक सैन्य शासन रह चुका है। इसके अलावा बिना आर्मी की कृपा के यहां कोई भी सिविलयन सरकार रह नहीं पाई। 

पाकिस्तान में आर्मी के सीनियर अधिकारी पर्दे के पीछे से डोर खींचने का काम करते हैं। विदेश और वित्तीय नीतियां बनाने में भी सेना का दखल रहता है। नया सेना प्रमुख भारत के साथ संबंधों और अफगानिस्तान में तालिबान पर भी नया विचार रख सकता है। सवाल यह भी है कि नया सेना प्रमुख मिलने के बाद पाकिस्तान का झुकाव चीन की ओर ज्यादा बढ़ेगा या फिर अमेरिका की तरफ। 

पाकिस्तान के लिए क्या हैं मायने?
पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया केवल दिखाने की है। यहां अब तक 30 प्रधानमंत्रियों में से केवल 19 चुने गए हैं। इनमें से एक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। दो प्रधानमंत्रियों की हत्या कर दी गई। आर्मी ने कहा था कि अब वह राजनीति में दखल नहीं देगी। हालांकि यह संभव नहीं लगता है। देखना यह है कि नया आर्मी चीफ पाकिस्तान की गड्ढे में धंसती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक हालात को लेकर कोई फैसला कर पाएंगे कि नहीं। 

भारत के लिए क्यों है अहम?
पाकिस्तान में आर्मी चीफ भारत के लिए भी मायने रखता है। 2021 के शुरुआत में जनरल बाजवा ने एलओसी पर सीजफायर को लेकर समझौता किया था। हालांकि देखना यह है कि नए आर्मी चीफ के आने पर एलओसी पर शांति रहेगी या नहीं। क्या घुसपैठिए फिर से जोरशोर से सीमा पर डिस्टर्ब करेंगे। यह भी देखना है कि पाकिस्तान घाटी में कैसे परेशानी पैदा करता रहेगा? 

कैसे होती है  पाकिस्तान के सेना प्रमुख की नियुक्ति
पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 (3) के मुताबिक राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश से सेना प्रमुख की नियुक्ति करता है। परंपरा यह है कि सेना की तरफ से सीनियर अधिकारियों के पांच नाम पीएमओ को भेजे जाते हैं। इसके बाद रक्षा मंत्रालय और कैबिनेट से सलाह करके इनमें से एक नाम की सिफारिश राष्ट्रपति से की जाती है। इसके लिए रिटायर होने वाले सेना प्रमुख से भी सलाह ली जाती है। सलाहकारों से बातचीत के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। 

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