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Monday, January 24, 2022
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क्रिसमस में ढिलाई के चलते बंगाल में कोरोना विस्फोट! मिले रिकॉर्ड नए केस; एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में हर दिन औसतन लगभग 500 ताजा मामले सामने आ रहे थे, जो कि अब 24,000 को पार कर गई है। मार्च 2020 में राज्य में पहले कोरोना वायरस मामले का पता चलने के बाद से राज्य में अब तक दर्ज किए गए कोविड -19 मामलों की यह सबसे अधिक संख्या है।

विशेषज्ञों ने दावा किया है कि वर्तमान उछाल का ट्रिगर बिंदु कोलकाता में पार्क स्ट्रीट पर क्रिसमस की सभा थी। कहा जा रहा है कि इसने ही शायद ‘सुपर-स्प्रेडर’ के रूप में काम किया हो। राज्य सरकार ने कहा कि लोगों के जीवन और आजीविका को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं।

ममता ने की लोगों से मास्क पहनने की अपील
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “केवल हम ही खुद को बचा सकते हैं। सरकार जुर्माना नहीं लगा सकती और न ही किसी को मास्क पहनने के लिए बाध्य कर सकती है। लोगों को खुद करना होगा। मैं सभी से हाथ जोड़कर अनुरोध करूंगी कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मास्क पहनें और अपने हाथों को साफ करें।”

एक्सपर्ट्स की राय- पीक आना अभी बाकी
वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अभी सबसे बुरा समय आना बाकी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में आयोजित एक आंतरिक बैठक में डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि पश्चिम बंगाल में तीसरी लहर के चरम के दौरान 30,000 से 35,000 की दैनिक मामले सामने आ सकते हैं।वरिष्ठ डॉक्टरों ने चेतावनी दी, “नया वैरिएंट 3-5 गुना तेजी से फैलता है। आने वाले दिनों में मामले कई गुना बढ़ जाएंगे। इस बार हम हर दिन 30,000 से 35,000 मामलों की उम्मीद कर सकते हैं। उम्मीद है कि उछाल 22 अप्रैल से आगे नहीं रहेगा।”

आपको बता दें कि बंगाल में रविवार को 24287 ताजा मामले दर्ज किए गए। अक्टूबर 2020 के अंत में जब राज्य में कोरोना की पहली लहर पीक पर थी तो दैनिक मामले 4157 तक ही पहुंचे थे। दूसरी लहर की पीक यानी 2021 के मई में इसकी संख्या 20,846 को छू गई थी।

अकेले कोलकाता में 8700 से अधिक मामले
आपको बता दें कि अकेले कोलकाता ने 8712 मामले दर्ज किए हैं। वहीं, उत्तर 24 परगना महाराष्ट्र के ठाणे के बाद देश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला जिला है। यहां रविवार को 5000 से अधिक नए मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “कोलकाता केंद्र बना हुआ है। उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जैसे मेगा शहर से सटे जिलों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है। इन सभी जिलों में मामलों की दैनिक संख्या चार अंकों को छू गई है।”

इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि 2 से 8 जनवरी के बीच हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति के बाद  कोलकाता में पॉजिटिविटी रेट करीब 61 प्रतिशत रही। 24 से 31 दिसंबर के बीच शहर की साप्ताहिक सकारात्मकता दर 23.4% थी। इसकी तुलना में मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु (शहरी) में सकारात्मकता दर कम थी।

नए साल पर कोलकाता में नहीं लगे थे प्रतिबंध
मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में क्रिसमस और नए साल पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, कोलकाता में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं था। इसके उलट ममता बनर्जी-प्रशासन ने 24 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक के कर्फ्यू में ढील दी थी। 24 दिसंबर की शाम को पार्क स्ट्रीट पर विशाल सभाओं के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गई थीं और लोगों को कोविड -19 प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना देखा गया। 

नतीजा यह हुआ कि 28 दिसंबर से हर दिन मामले दोगुने होने लगे। बंगाल में 27 दिसंबर को लगभग 400 मामले दर्ज किए गए थे। एक हफ्ता के बाद 3 जनवरी को दैनिक गिनती 6000 से अधिक हो गई थी। 9 जनवरी को यह 24,000 का आंकड़ा पार कर गया था। .

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