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Tuesday, August 9, 2022
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उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग आज, NDA का पलड़ा भारी, धनखड़ को 67% वोट मिलने का अनुमान

आज होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन राजग के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का पलड़ा भारी है। विभिन्न दलों से मिले समर्थन को देखते हुए धनखड़ को 67 फीसदी से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है। विपक्षी उम्मीदवार कांग्रेस की मार्गेट अल्वा के साथ पूरा विपक्ष नहीं जुट पा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से दूरी बना ली है, तो बसपा, वाईएसआरसीपी, बीजद, तेलुगुदेशम जैसे दल धनखड़ के समर्थन में खड़े हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेता केशव राव ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गेट अल्वा का समर्थन करेगी।

इस समय दोनों सदनों में 788 सदस्य हैं। बहुमत का आंकड़ा 395 है। भाजपा के दोनों सदनों में अपने 394 सांसद हैं। यानी उसके अपने ही वोट 50 फीसदी हैं। राजग को मिलाकर यह आंकड़ा 445 सांसदों का हो जाता है। हाल के चार मनोनीत सांसदों को मिलाकर राजग के पास 449 सांसदों का समर्थन हो जाता है। इसके अलावा उसे अन्य दलों से भी समर्थन हासिल है। इनमें वाईएसआरसीपी (31), बीजद (21), बसपा (11), तेलुगुदेशम (4) शामिल हैं। इनके समर्थन के साथ धनखड़ के पक्ष में आंकड़ा 512 वोट का हो जाता है। राजग नेताओं को उम्मीद है कि इसके अलावा कई और दल और सांसद भी उसका समर्थन करेंगे और वह पिछली बार से ज्यादा वोट हासिल करेंगे।

वेंकैया नायडू ने बड़े अंतर से हासिल की थी जीत
मालूम हो कि पिछली बार 2017 के उप राष्ट्रपति चुनाव में राजग के वैंकेया नायडू ने विपक्ष समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी को हराया था। तब नायडू को 516 (67.89 फीसदी) व गांधी को 244 (32.11) फीसदी वोट मिले थे। इस बार विपक्ष और ज्यादा बिखरा हुआ है। विपक्षी दलों में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने अल्वा के नाम की घोषणा से पहले सहमति नहीं बनाने की कोशिशों का हवाला देते हुए मतदान प्रक्रिया से दूर रहने की घोषणा की है।

भाजपा ने सांसदों को कराया मतदान का अभ्यास
उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा ने एक दिन पहले शुक्रवार शाम को सभी सहयोगी दलों के सांसदों के साथ बैठक की है। इसमें सांसदों को मतदान का अभ्यास भी कराया गया, ताकि कोई भी वोट खराब न हो। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 17 वोट गलत मतदान के कारण रद्द कर दिए गए थे।

ऐसे होता है मतदान
चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार, एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा। और चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा होगा। इस प्रणाली में, निर्वाचक को उम्मीदवारों के नामों के सामने वरीयताएं अंकित करनी होती है। चुनाव में खुले मतदान की कोई अवधारणा नहीं है और राष्ट्रपति एवं उप राष्ट्रपति के चुनाव में किसी भी परिस्थिति में किसी को भी मतपत्र दिखाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। मतदान प्रक्रिया में यह प्रावधान है कि मतदान कक्ष में वोट पर निशान लगाने के बाद मतदाता को मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालना होता है। मतदान प्रक्रिया के किसी भी उल्लंघन पर पीठासीन अधिकारी द्वारा मतपत्र को रद्द कर दिया जाएगा।

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