- Advertisements -spot_img

Friday, January 21, 2022
spot_img

अब तक 15! यूपी में भाजपा छोड़ने वाले नेताओं की लंबी होती जा रही लिस्ट, जानें कौन कितना ताकतवर

उत्तर प्रदेश में अगले महीने से विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने वाली है। इससे पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खेमे में भगदड़ मच गई है। योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे समाजवादी पार्टी से हाथ मिला सकते हैं। हालांकि, इन्होंने सार्वजनिक तौर पर अखिलेश यादव की तारीफ की है।

भाजपा छोड़ने वाले पहले ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य थे, जो योगी आदित्यनाथ सरकार में श्रम, रोजगार, समन्वय मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके बाहर निकलने के बाद तीन अन्य भाजपा विधायक रोशनलाल वर्मा, बृजेश प्रजापति और भगवती सागर ने भी लगे हाथ इस्तीफा दे दिया। ये सभी नेता गैर यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं।

मौर्य के भाजपा से बाहर होने और बाद में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ बैठक के एक दिन बाद, यूपी के मंत्री दारा सिंह चौहान ने योगी आदित्यनाथ सरकार से इस्तीफा दे दिया। भाजपा विधायक मुकेश वर्मा, विनय शाक्य, बाला प्रसाद अवस्थी और अवतार सिंह भड़ाना ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद यूपी के मंत्री धर्म सिंह सैनी का नाम इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में सामने आया। उन्होंने गुरुवार को अपना इस्तीफा दे दिया। उसी दिन अखिलेश यादव से मुलाकात करने वाले सैनी ने यहां तक ​​दावा किया कि 20 जनवरी तक हर दिन “एक मंत्री और दो-तीन विधायक भाजपा छोड़ देंगे”।

हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले भाजपा नेता:

स्वामी प्रसाद मौर्य
पांच बार के विधायक रहे स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने यूपी के कुशीनगर जिले के पडरौना से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पिछले तीन चुनाव जीते हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक जीवन 1980 के दशक में युवा लोक दल के साथ शुरू हुआ था। वह 1996 में बसपा में शामिल होने से पहले जनता दल के साथ भी कुछ समय के लिए काम किए थे। यूपी की राजनीति में उनकी छवि एक मजबूत गैर यादव ओबीसी नेता के तौर पर है। मौर्य ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के साथ भी बतौर मंत्री काम किया। दिलचस्प बात यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य 2019 से बीजेपी सांसद हैं।

रोशनलाल वर्मा
रोशनलाल वर्मा यूपी के शाहजहांपुर जिले के तिलहर से तीन बार के भाजपा विधायक हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में वर्मा ने कांग्रेस के पूर्व नेता जितिन प्रसाद को हराया था, जो अब भाजपा के साथ हैं। भाजपा छोड़ने का कारण पूछने पर रोशनलाल वर्मा ने कहा, “यह निर्णय एक दिन में नहीं लिया गया, क्योंकि मैं गरीबों की सेवा के लिए भाजपा में शामिल हुआ था। पार्टी ने किसानों, दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों की उपेक्षा की है।”

बृजेश प्रजापति
स्वामी प्रसाद मौर्य के करीबी के रूप में देखे जाने वाले बृजेश कुमार प्रजापति  यूपी के बांदा में तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। उन्होंने मंगलवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। प्रजापति कानून के जानकार हैं। भाजपा के टिकट पर वह 2017 में पहली बार यूपी विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 2010 और 2012 के बीच उत्तर प्रदेश पिछड़ा आयोग के सदस्य के रूप में भी काम किया है। पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा को लिखे पत्र में बृजेश कुमार प्रजापति ने लिखा कि पिछड़ी जातियों, दलितों, मुसलमानों और छोटे व्यापारियों के प्रति यूपी सरकार की “अज्ञानता” ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

भगवती शरण सागर
कानपुर नगर जिले के बिल्हौर से भाजपा विधायक रहे भगवती सागर चार बार विधायक रहे हैं। वह 1993 में भोगनीपुर, 1996 में बिल्हौर और 2007 में मौरानीपुर से यूपी विधानसभा के लिए चुने गए थे। 2012 में पार्टी से निकाले जाने से पहले सागर बसपा के साथ थे। इसके बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।

दारा सिंह चौहान
यूपी सरकार में वन, पर्यावरण और पशुपालन मंत्री दारा सिंह चौहान ने 1996 में बसपा के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और सपा के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए चुने गए। चौहान 2009 के आम चुनावों से पहले बसपा में लौट आए और उन्हें लोकसभा में बसपा संसदीय दल का नेता भी नियुक्त किया गया। दारा सिंह चौहान 2015 में भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें पार्टी के ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने मऊ जिले के मधुबन निर्वाचन क्षेत्र से 2017 यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा और एक सहज अंतर से जीत हासिल की थी।

मुकेश वर्मा
मुकेश वर्मा 2017 में बीजेपी के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे। वर्मा फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।  पेशे से चिकित्सक वर्मा निषाद समुदाय से हैं।

विनय शाक्य
यूपी के औरैया जिले के बिधूना विधानसभा क्षेत्र से पहली बार भाजपा विधायक विनय शाक्य  ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा की है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद शाक्य की बेटी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें दावा किया गया कि उनके पिता का “अपहरण” किया गया था। विधायक ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि उनकी बेटी का दावा गलत है।

बाला प्रसाद अवस्थी
बाला प्रसाद अवस्थी तीन बार के विधायक हैं। उन्होंने 2017 के यूपी चुनाव में लखीमपुर जिले के धौरहरा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा से जुड़े होने से पहले अवस्थी मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र से बसपा विधायक थे।

अवतार सिंह भड़ाना
यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के मीरापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो गए हैं, जो समाजवादी पार्टी का सहयोगी है। भड़ाना एक गुर्जर नेता हैं, जिन्होंने 2016 में भाजपा में प्रवेश किया। कांग्रेस के साथ अपने समय के दौरान, अवतार सिंह भड़ाना चार बार लोकसभा के लिए चुने गए, यूपी में मेरठ और हरियाणा में फरीदाबाद का प्रतिनिधित्व किया।

धर्म सिंह सैनी
योगी आदित्यनाथ सरकार में एक और मंत्री, धर्म सिंह सैनी यूपी के सहारनपुर जिले के नकुड़ से चार बार विधायक हैं। सैनी 2016 में भाजपा में शामिल होने से पहले बसपा में थे।

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Related Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Stay Connected

563FansLike
0FollowersFollow
24FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisements -spot_img

Latest Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img