- Advertisements -spot_img

Sunday, November 27, 2022
spot_img

Cyber Crime: गोरखपुर में बीआरडी पर हो चुका है साइबर अटैक, एम्स का सर्वर भी दगाबाज

एम्स दिल्ली में हुए साइबर अटैक के मामले ने एक बार फिर से सरकारी अस्पतालों की डाटा सिक्योरिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्वी यूपी के चिकित्सा संस्थान भी साइबर हमलावरों के रडार पर हैं। देशभर के चिकित्सा संस्थान आधुनिकता की दौड़ में शामिल हैं। संस्थान अब पेपरलेस होने की मुहीम चला रहे हैं। अस्पतालों में ओपीडी, आईपीडी और प्रशासन का काम कंप्यूटर की मदद से हो रहा है। ऑनलाइन सिस्टम से अस्पताल के सभी विभाग आपस में जुड़े हैं। इस सुविधा के कारण मरीज घर बैठे ही ओपीडी में बुकिंग करा पा रहा है। मरीज की जांच रिपोर्ट उसके मोबाइल पर सॉफ्टकॉपी के रूप में मिल जा रही है। कंप्यूटर के एक क्लिक पर अस्पताल डाटा मैनेज हो जा रहा है।

एम्स है निशाने पर
यह देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार है। यहां पर रोजाना 3000 मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। करीब 200 बेड की आईपीडी शुरू हो चुकी है। एम्स में एडवांस सिस्टम को संचालित किया जा रहा है। एम्स में ज्यादातर काम ऑनलाइन इंटरनेट के जरिए होता है। अंर्तिवभागीय संवाद भी ईमेल के जरिए होता है। इस वजह से एम्स हैकर्स के टारगेट पर है। एम्स के नेटवर्क में सेंधमारी की कोशिश की जाती है। एम्स की आईटी टीम चौकन्ना है। इसे सीडैक के एक्सपर्ट संभाल रहे हैं। उसने ऐसे किसी भी सेंधमारी को रोकने के लिए फायरवाल सिस्टम का मजबूत नेटवर्क स्थापित कर रखा है।

CM योगी के गोरखपुर में धुआंधार दौरे देंगे 3500 करोड़ की सौगात, 27 नवंबर से शुरू

बीआरडी पर हो चुका है साइबर अटैक
जून 2021 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर साइबर अटैक हुआ था। एसआईसी डॉ. राजेश राय ने बताया कि तीन दिन तक बीआरडी के ओपीडी का सर्वर डाउन रहा। बीआरडी प्रशासन ने इस मामले में पुलिस में शिकायत की। इसको ठीक करने में एनआईसी के विशेषज्ञों की मदद ली गई। सिस्टम रीस्टोर होने में तीन दिन लगा। चौथे दिन से ओपीडी में पर्चा बनने लगा था। माना जाता है कि इस अटैक में ओपीडी में मरीजों का कुछ रिकॉर्ड करप्ट हुआ था। इस बाबत आईटी एक्सपर्ट समीर राय ने बताया कि साइबर अटैक से बचने के लिए इंटरनेट सिक्योरिटी एंटीवायरस इंस्टाल करना चाहिए। ईमेल का आईडी व पासवर्ड शेयर नहीं करना चाहिए। पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। पासवर्ड को बनाते समय अल्फाबेट, न्यूमेरिक और सिम्बल्स का प्रयोग करना चाहिए। गूगल ड्राइव पर डाक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखना चाहिए। हार्ड कॉपी में भी डाक्यूमेंट्स को रखना चाहिए।

लैन से संचालित होते हैं जिला व महिला अस्पताल
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में हॉस्पिटल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर लगाया गया है। यहां पर कंप्यूटर लगा है। यहां पर ज्यादतर काम मैनुअल होता है। यहां अधिकांश कंप्यूटरों से इंटरनेट को नहीं जोड़ा गया है। इससे साइबर हमला का खतरा कम है।

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Related Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img

Stay Connected

563FansLike
0FollowersFollow
22FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisements -spot_img

Latest Articles

- Advertisements -spot_img
- Advertisements -spot_img