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Thursday, January 20, 2022
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सपा को मिला स्वामी का ‘प्रसाद’, समझें मौर्य का जाना BJP के लिए कितना बड़ा नुकसान

स्वामी प्रसाद मौर्य ने जिस तरह 2017 के चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी को झटका देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था उसी तरह अब मतदान की तारीखों के ऐलान के बाद अब उन्होंने भगवा दल का साथ छोड़ दिया है। इधर उनके इस्तीफे की खबर आई और उधर अखिलेश यादव ने ट्विटर पर मौर्य के साथ तस्वीर साझा करते हुए बता दिया कि स्वामी का ‘प्रसाद’ अब सपा को मिलेगा। 

अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य का पार्टी में स्वागत करते हुए लिखा, ”सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता स्वामी प्रसाद मौर्या जी और उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत और अभिनंदन! सामाजिक न्याय का इंकलाब होगा, बाइस में बदलाव होगा।”

BJP के लिए क्यों है बड़ा झटका?
स्वामी प्रसाद मौर्य का जाना बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह ना सिर्फ योगी सरकार में मंत्री थे, बल्कि यूपी के दिग्गज नेताओं में शुमार किए जाते हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उनके कई समर्थक विधायक और नेता भी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के कद और प्रभाव का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके सपा में चले जाने के बाद भी बीजेपी उन्हें वापस लाने की कोशिश करती दिखी। खुद डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मोर्चा संभाला और उन्होंने स्वामी से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। उन्होंने साथ बैठकर चर्चा करने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि जल्दबाजी में फैसले अक्सर गलत हो जाते हैं।

जातियों की राजनीति में बड़ा फैक्टर हैं मौर्य
उत्तर प्रदेश की राजनीति से वाकिफ लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि यहां चुनाव में जाति कितना बड़ा फैक्टर है। स्वामी प्रसाद मौर्य यूपी के बड़े ओबीसी नेता हैं। पांच बार के विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य का कुशवाहा, मौर्य, शाक्य और सैनी समुदाय पर अच्छा प्रभाव माना जाता है। मौर्य और कुशवाहा सबसे प्रमुख पिछड़ी जातियां हैं। पूर्वांचल और अवध के जिलों में इनकी अच्छी आबादी है। माना जा रहा है कि मौर्य के जाने से बीजेपी को ओबीसी वोटों को अपने साथ जोड़े रखने में चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कुछ अन्य छोटे दलों को साथ जोड़ चुकी है, जिनका ओबीसी वोट बैंक पर प्रभाव है।

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