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Friday, December 2, 2022
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विद्यालयों के निरीक्षण में लापरवाही पर भड़के डायट प्राचार्य- कार्यवाही के निर्देश

निरीक्षण करते प्राचार्य

जिला मुख्यालय के विद्यालयों में भारी कमियां आई सामने

कहीं कम उपस्थिति तो कहीं सरकार की योजनाएं फांक रहीं हैं धूल


अम्बेडकरनगर। प्राचार्य डायट मनोज कुमार गिरी द्वारा परिषदीय विद्यालयों के निरीक्षण के क्रम में शिक्षा क्षेत्र अकबरपुर में शुक्रवार को कंपोजिट विद्यालय गदायां, प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर नवीन, प्राथमिक विद्यालय काशीपुर, प्राथमिक विद्यालय माउख और कंपोजिट विद्यालय पचाउख का निरीक्षण किया गया। कंपोजिट विद्यालय गदायां में सही प्रकार से उपचारात्मक शिक्षा नहीं चल रही थी,निपुण भारत मिशन का कार्यक्रम का भी संचालन नहीं था और विद्यालय में काफी गंदगी दिखाई दी इस पर प्राचार्य द्वारा काफी नाराजगी व्यक्त की गई।

लापरवाही पर इनके ऊपर कार्यवाही के निर्देश

कंपोजिट विद्यालय गदायां की प्रधानाध्यापक प्रवीन बनों तथा प्राथमिक विद्यालय काशीपुर के प्रधानाध्यापक अमित कुमार के ऊपर कार्यवाही करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि हेतु प्राचार्य डायट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया। अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को भी निर्देशित किया गया कि वह लेशन प्लान बना कर लाए उसके द्वारा शिक्षण कार्य करें एवं बच्चों के अधिगम स्तर को और बढ़ाएं, प्राथमिक विद्यालय काशीपुर में उपस्थिति कम होने पर फटकार लगाई गई। कंपोजिट विद्यालय पचाउख में कक्षा आठ के छात्र – छात्राओं को कैल्शियम और मैग्नीशियम के बारे में पता नहीं था।

धूल फांक रहे हैं बेसिक शिक्षा के सारे तंत्र

सवाल इस बात को लेकर है कि जनपद में कार्यरत खंड शिक्षा अधिकारी ब्लॉकों के ए आर पी व न्याय पंचायत स्तर पर संकुल शिक्षक इस व्यवस्था को अपनी विफलता क्यों नहीं मान रहे हैं क्योंकि इन लोगों के निरीक्षण में परिषदीय विद्यालयों में कोई कमी नहीं मिलती है लेकिन प्राचार्य डायट लगातार ईमानदारी के साथ निरीक्षण कर बेसिक शिक्षा विभाग को आईना दिखा रहे हैं।

नाक के नीचे ही घोर लापरवाही तो ग्रामीण स्तर पर क्या होगी दशा

प्राचार्य डायट ने कंपोजिट विद्यालय गदायाँ के प्रधानाध्यापक पर कार्यवाही हेतु बीएसए को निर्देशित किया है वह विद्यालय जिला मुख्यालय पर स्थित है लेकिन उसकी दशा काबिले तारीफ है अगर इसी तरह बेसिक की शिक्षा व्यवस्था रही तो वह दिन दूर नहीं है कि सरकार ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर बंद करने का फैसला लेने पर मजबूर हो जायेगी या किसी निजी संस्था के हवाले कर देगी। सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी जनपद में बेसिक शिक्षा की इस तरह की दुर्गति चिंताजनक है जिस पर उच्च अधिकारियों को भी विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि जब जिला मुख्यालय की ही ऐसी दशा है तो ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का स्तर क्या होगा इसकी कल्पना आप स्वयं कर सकते हैं।

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