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Monday, January 24, 2022
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यूपी चुनाव से पहले NDA में टकराव: BJP का साहनी को सख्त संदेश, झुकने को तैयार नहीं ‘सन ऑफ मल्लाह’

बिहार में एनडीए सरकार में सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है तो भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी के मुखिया मुकेश साहनी को सख्त संदेश दे दिया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने साहनी से कह दिया है कि उनका यह कदम बिहार विधानपरिषद का सदस्य दोबारा चुने जाने और जल्द बोचाचा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में भारी पड़ सकती है। 
 
खुद को ‘सन ऑफ मल्लाह’ कहने वाले साहनी एनडीए सरकार का अहम हिस्सा हैं। एनडीए के विश्वसत सूत्रों ने बताया कि  3 विधायकों वाली पार्टी के प्रमुख साहनी को बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने बता दिया है कि उनका यूपी चुनाव में उतरना गठबंधन के लिए ठीक नहीं है, और हो सकता है कि भगवा दल दोबारा एमएलसी चुने जाने के लिए समर्थन ना दे। बॉलिवुड के सेट डिजाइनर रहे 40 वर्षीय साहनी को जनवरी 2021 में दो साल से कम समय के लिए ही एमएलसी चुना गया था और उनका कार्यकाल इस साल जुलाई में खत्म होने वाला है। दोबारा चुने जाने के लिए साहनी को बीजेपी के समर्थन की जरूरत होगी। साहनी नीतीश सरकार में मत्स्य और पशुपालन विभाग के मंत्री हैं। 

हालांकि, साहनी ने बीजेपी की ओर से ऐसे किसी संदेश मिलने की बात से इनकार किया। उन्होंने एचटी से फोन पर कहा, ”मुझे ऐसा कोई संदेश नहीं मिला है। मैं यूपी चुनाव लड़ने को अडिग हूं। यदि बीजेपी मुझे एमएलसी के दूसरे कार्यकाल के लिए समर्थन नहीं देगी तो यह वह अपने उस वादे को तोड़ेगी, जो मुझसे 2020 विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में आते समय किया गया था। मुझे कोई परवाह नहीं है।”

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी उन खबरों पर टिप्पणी से बचते नजर आए कि उनकी पार्टी ने यूपी चुनाव लड़ने से रोकने के लिए साहनी को सख्त संदेश दिया है।  उन्होंने कहा, ”हमारे सभी सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध हैं। मुझे आगे कोई टिप्पणी नहीं करनी है।” जायसवाल ने यह भी कहा कि गठबंधन संबंधी सभी मामलों को केंद्रीय नेतृत्व देखता है, नाकि राज्य ईकाई।

बीजेपी और एनडीए के आंतरिक सूत्र बताते हैं कि भगवा दल ने वीआईपी चीफ को यह संदेश उन घटनाक्रम के बाद दिया है, जिसके तहत वह हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश में निषाद और मल्लाह (मछुआरा समुदाय) को एसटी की बजाय ओबीसी में शामिल किए जाने समेत कुछ मुद्दों पर साथ लेने की कोशिश कर रहे हैं। इनका कहना है कि वीआईपी को रोकने के पीछे राजनीतिक वजहें हैं। पहला यह कि वीआईपी में निषाद और दूसरे उपजातियों के वोट में खासकर पश्चिमी यूपी में, सेंध लगाने की क्षमता है, दूसरा यह कि बीजेपी साहनी से गठबंधन के मूड में नहीं है। क्योंकि इसने पहले ही NISAD पार्टी चीफ संजय निषाद से गठबंधन कर लिया है।  

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने पहचान सार्वजनिक नहीं किए जाने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा, ”शाहनी गठबंधन के लिए और सीटों के मोलभाव को लेकर बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं। बीजेपी उन्हें गठबंधन में कोई सीट देने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि बीजेपी शाहनी से सख्ती से बात कर रही है। निश्चित तौर पर इस बात का खतरा मंडरा रहा है कि अगर साहनी यूपी में उम्मीदवार उतारते हैं तो वे बीजेपी समेत कई पार्टियों के चुनावी गणित को बिगाड़ सकते हैं। 

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