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Thursday, January 20, 2022
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यूपी चुनावः भाजपा के संभावित प्रत्याशियों में कई सांसद-एमएलसी के नाम, बड़े चेहरों के साथ माहौल बनाएगी पार्टी

यूपी चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची शनिवार को आ सकती है। भाजपा नेताओं ने सूची को अंतिम रूप दे दिया है। योगी अभी एमएलसी हैं। उनको अयोध्या से लड़ाकर पार्टी जहां उनकी कट्टर हिंदूवादी छवि का लाभ लेना चाहती है, वहीं राममंदिर मुद्दे को भी 2024 तक लगातार चर्चा में रखना चाहती है। दरअसल 2024 तक भव्य मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा विधान परिषद सदस्य केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू से लड़ाकर पूर्वांचल में लाभ लेने की योजना है। पिछला विधानसभा चुनाव केशव मौर्य के प्रदेश अध्यक्ष काल में ही लड़ा गया था, जिसमें पार्टी को पिछड़ों का बंपर वोट मिला था। 

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के जरिए भी पार्टी प्रदेश के कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को रिझाना चाहती है। वे भी विधान परिषद में हैं। एमएलसी डा. दिनेश शर्मा पार्टी के ब्राह्मण चेहरों में शुमार हैं। उनके लिए भी लखनऊ में सीट खोजी जा रही है।

फिलवक्त विधान परिषद सदस्य ठाकुर जयवीर सिंह को भी अलीगढ़ की बरौली सीट से लड़ाने की योजना है। जयवीर उस इलाके के कद्दावर नेता होने के साथ ही सजातीय वोटों पर पकड़ भी रखते हैं। भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप विधान परिषद और राज्यसभा सदस्य रहे हैं। उन्हें चरथावल से उतारा जा सकता है।

इसके अलावा पार्टी वरिष्ठ नेता और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को फिर मैदान में उतारने की तैयारी में है। पार्टी कुछ राज्यसभा सांसदों को भी मैदान में उतार सकती है। ऐसे संभावित चेहरों में ब्रजलाल, गीता शाक्य, बीएल वर्मा भी हो सकते हैं। हालांकि वर्मा फिलहाल केंद्र में मंत्री हैं। शिवप्रताप शुक्ला का कार्यकाल भी 2022 में खत्म होने जा रहा है।

बड़े चेहरों से माहौल बनाने की तैयारी

भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश के कई हेवीवेट चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। इन चेहरों के जरिए पार्टी यूपी का चुनावी माहौल गर्माएगी। भगवा खेमे के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे योगी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डा. दिनेश शर्मा सहित कुछ सांसदों और विधान परिषद सदस्यों को मैदान में उतारने से जहां पार्टी को लाभ मिलेगा, वहीं जातीय गुणा-गणित का संदेश भी दूर तक जाएगा।

भाजपा इस चुनाव में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकास की चाशनी में पगे हिन्दुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। वहीं उसकी मुख्य विरोधी समाजवादी पार्टी किसी तरह चुनाव को अगड़े-पिछड़े के एजेंडे पर ले जाना चाहती है। भाजपा ने भी विपक्षी तरकश के तीरों से निपटने की भरपूर प्लानिंग कर रखी है। भाजपाई रणनीतिकारों ने बीते तीन दिनों में दिल्ली में सिर्फ टिकटों पर ही मंथन नहीं किया बल्कि आगे की चुनावी रणनीति को भी अंतिम रूप दिया है।

पीएम मोदी के रूप में भाजपा जहां अपने सबसे बड़े ब्रांड को चुनावी घोषणा से पहले ही आगे कर चुकी है। योगी जैसे फायरब्रांड चेहरा भी इस चुनाव में पार्टी के पास है जो 2017 में नहीं था। इनके अलावा भाजपा अपने प्रदेश स्तरीय और बड़े इलाकाई क्षत्रपों का भी प्रयोग करने की योजना बनाई है।

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