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Saturday, October 1, 2022
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यूपी की पहली 'ममीफाइड' बॉडी? क्‍या सच में 17 महीने तक बिना केमिकल सुरक्ष‍ित रहा विमलेश का शव, जानें क्‍या बोले एक्‍सपर्ट

आयकर अधिकारी विमलेश की मौत के बाद 17 महीने तक उनके शव को घर में रखकर सेवा करने वाले परिवार का कहना है कि उन्‍होंने शव को संरक्षित करने के लिए किसी केमिकल का इस्‍तेमाल नहीं किया। बल्कि परिवार तो यही मानकर चल रहा था कि विमलेश जिंदा हैं। जबकि हकीकत यह है कि उनकी मौत 17 महीने पहले ही हो चुकी थी। तो फिर विमलेश का शव आखिर 17 महीने तक बिना किसी बदबू या सड़न के सुरक्षित कैसे रहा। एक भरा पूरा परिवार 17 महीने तक कैसे एक लाश के साथ सामान्‍य जिंदगी जीता रहा और पड़ोसियों से भी यह सच्‍चाई छिपी रह सकी। विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि विमलेश की बॉडी, ‘ममीफाइड बॉडी’ हो गई हो। यह प्रदेश का पहला मामला हो सकता है। इसमें शरीर को उपलब्ध कई तरीके के रासायनिक लेपों द्वारा संरक्षित किया जाता है।

स्टेट मेडिकोलीगल सेल के संयुक्त निदेशक डा. कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा परिजनों कोई केमिकल लगाने से इनकार कर रहे हैं ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है। इसकी जांच सीटी इमेजिंग/वर्चुअल अटोप्सी द्वारा की जा सकती है। टिश्यू को नुकसान न पहुंचाकर आंतरिक अंगों का सफलतापूर्वक परीक्षण कर मृत्यु के कारणों को जाना जा सकता था। यह भी सम्भव है कि परिजनों की बात आंशिक सच हो। कुछ वक्त धड़कन मौजूद रही हो। एक लंबे समय तक कोमा से इनकार नहीं किया जा सकता है।

17 महीने तक मृत पति के पैर छूकर ड्यूटी पर जाती रही बैंक मैनेजर पत्‍नी

मनोवैज्ञानिक का निष्कर्ष यह केस साइकोटिक डिसऑर्डर का
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ.गणेश शंकर का कहना है कि प्रथमदृष्टया यह केस शेयर्ड साइकोटिक डिस्ऑर्डर ( यानी शेयर्ड डिलियुजनल डिस्आर्डर) का लग रहा है। इसमें परिवार में एक प्रभावी इंसान के भ्रम पर विश्वास करने के लक्षण परिवार के सदस्यों में आ जाते हैं। इस बीमारी में परिवार के इंसान विचार और व्यवहार में ढलने लगते हैं। साथ ही अगर परिवार में कोई व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होता है तो उसका असर अन्य सदस्यों पर पड़ने लगता है। देश में इससे पहले इसी तरह के डिस्आर्डर केस इंडियन साइक्रायटिक जर्नल में डॉ. आशी ने रिपोर्ट किया था। उसमें पति-पत्नी और उनके दो बच्चों में यह डर घर गया था कि पड़ोसी उनके परिवार को मारना चाहता है जबकि ऐसा नहीं था। 

तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद निकला शव
स्वास्थ्य विभाग की टीम 1100 बजे विमलेश के घर पहुंची, पर परिवार ने अंदर नहीं जाने दिया। डिप्टी सीएमओ और डीसीपी तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद शव लगभग 2 बजे को बाहर निकाल सके।

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