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Saturday, January 22, 2022
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डीडीयू के प्रोफेसर ने लगाया VC पर आरोप, बोले-मेरे खिलाफ साजिश रच सकते हैं वाइस चांसलर

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के ओएसडी की शिक्षकों से मुलाकात, शिक्षकों के आंदोलन समेत तमाम मुद्दों के बीच अमेरिका की यात्रा से वापस लौटे कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बगावती माहौल शांत कराने का प्रयास शुरू कर दिया है। मंगलवार को एक-एक कर संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों व अन्य शिक्षकों से मुलाकात की। अक्तूबर में विभागाध्यक्षों को जारी किए नोटिस वापस लेने का भी उन्होंने निर्णय लिया।

कुलपति ने अपने खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले प्रो. कमलेश गुप्त के साथ बैठक के लिए भी समय तय कर रखा था। उस बैठक में हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार राय और वर्तमान अध्यक्ष प्रो. दीपक त्यागी को भी आमंत्रित किया गया था। पूर्व और वर्तमान विभागाध्यक्ष तो तय समय पर पहुंच गए लेकिन प्रो. कमलेश नहीं पहुंचे। इस दौरान कुलपति ने बताया कि प्रो. गुप्त को 24 नोटिस के बाद निलंबित किया गया है। उन्होंने अपनी किसी समस्या के समाधान के लिए उनसे मिलने की कोशिश नहीं की। जब विश्वविद्यालय ने पहल की तो वह नहीं आए।

उधर, निलंबित प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने मंगलवार को कुलपति द्वारा संदेश भेजने के बावजूद मिलने न जाने को लेकर अपनी सफाई दी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, कुलपति ने जिस तरह के आरोप लगाए/लगवाए हैं, उससे यह आशंका है कि वे मेरे खिलाफ कुछ भी साजिश रच सकते हैं। बताया कि मंगलवार को दोपहर में 1:45 बजे कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने मेरे पास भी मिलने का संदेश भेजवाया था। मैंने जवाब दिया है कि यदि कुलसचिव के माध्यम से लिखित रूप में सूचना दी जाएगी और मुद्दा बताया जाएगा कि किस मुद्दे पर कुलपति मुझसे मिलना चाहते हैं, तो मैं मिलने पर विचार करूंगा, अन्यथा नहीं। मैंने सुना है कि कुलपति ने शिक्षकों से यह कहा है कि मैंने उनके नोटिस का जवाब नहीं दिया है। कुलपति चाहें तो अपने सारे नोटिस और मेरे सारे जवाबों को सार्वजनिक कर सकते हैं। हां, मैंने अंग्रेजी में मिले किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया है। आगे भी वे अंग्रेजी में कोई नोटिस भेजवाएंगे, तो मैं उसका जवाब नहीं दूंगा।

प्रो. कमलेश गुप्त ने कुलपति प्रो. राजेश सिंह पर फिर हमला बोला है। उन्होंने कहा है, कुलपति 3 जनवरी को अमेरिका से लौटे हैं और 4 जनवरी को विवि के बहुत से शिक्षकों से मुलाकात की। यदि कोई कोराना संक्रमित होता है तो इसके लिए कुलपति ही जिम्मेदार होंगे। क्वारंटीन का नियम हो या न हो, कुलपति को अमेरिका से लौटने के एक ही दिन बाद इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों से नहीं मिलना चाहिए था।

फिर बोला कुलपति पर हमला

बताते हैं कि संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और उसके बाद शिक्षकों से मुलाकात के दौरान कुलपति ने पहले ही साफ कर दिया कि खुलकर अपनी बात रखें। हर समस्या का समाधान निकाला जाएगा। विभागाध्यक्षों को नोटिस जारी करने पर चर्चा छिड़ी तो कुलपति ने बीते दिनों जारी नोटिस वापस लेने की बात कही। इसके बाद कुछ विभागाध्यक्षों ने सीबीसीएस पैटर्न लागू करने पर प्रशंसा पत्र की मांग उठाई तो कुलपति ने कुलसचिव को निर्देश जारी कर दिया। तीन घंटे की मैराथन बैठक में कुलपति ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय में कई गतिविधियां हुईं। उन्हें बताया गया कि कुछ विभागाध्यक्ष अपनी समस्या रखना चाहते हैं। इसीलिए मुलाकात का निर्णय लिया गया।

कुलपति ने कहा कि वे सकारात्मक सोच के साथ विवि को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी क्रम में उन्होंने अमेरिका की यात्रा की है। बताया कि यात्रा के दौरान वो अमेरिका की जॉन होपकिंग यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड कॉलेज पार्क, यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का गए। इन ख्यातिलब्ध संस्थानों से विश्वविद्यालय को नई उचाईयों पर ले जाने के लिए जल्द करार किया जाएगा। कुलपति ने यह भी साफ किया कि अनुशासनहीनता के लिए विश्वविद्यालय में कोई जगह नहीं है इसलिए कोई भी अपने साथियों को भड़काए नहीं। कुलपति ने बताया कि बुधवार को विश्वविद्यालय के नियमित कर्मचारियों, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों, सिक्योरिटी गार्ड, हास्टल वार्डन और पुरातन छात्रों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह समस्याओं को लेकर उनसे चाय पर चर्चा करेंगे।

पढ़ाए गए पाठ्यक्रम में से ही पूछे जाएंगे सवाल

कुलपति ने कहा है कि प्री-पीएचडी विद्यार्थियों को सात और नौ नवम्बर को आयोजित होने वाली परीक्षा से डरने की जरूरत नहीं है। इस परीक्षा में पाठ्यक्रम का वही पूछा जाएगा, जितना पढ़ाया गया है। बुधवार को इसे लेकर कुलसचिव कार्यालय से आधिकारिक जानकारी भी दे दी जाएगी।

26 से पहले प्रमोशन, आवास, पीएचडी इंक्रीमेंट पर निर्णय

शिक्षकों की बैठक में प्रमोशन, आवास आवंटन, पीएचडी इंक्रीमेंट, मेडिकेम इंश्योरेंस से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि 26 जनवरी से पहले इन समस्याओं का निदान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसोसिएट प्रोफेसर के प्रमोशन और पीएचडी इंक्रीमेंट के मुद्दे पर विचार के लिए तीन संकायाध्यक्ष, कुलसचिव, वित्त अधिकारी की समिति बनाई जाएगी। समिति दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। प्रमोशन के लिए एपीआई की गणना कराकर, एक्सपर्ट पैनल लेने की प्रक्रिया को भी पूर्ण किया जाएगा। वर्ष 2018 में नियुक्ति पाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रमोशन के फार्म को भरवाने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।

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