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Saturday, October 1, 2022
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चाट-समोसा बेचने वाले के बेटे ने मोदी को सौंपा INS विक्रांत का रिमोट, TV पर देखकर चौड़ा हो गया पिता का सीना

चाट-समोसा बेचने वाले एक शख्स ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसके बेटे को टीवी पर देखेगा, वह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ। मौका था देश को आईएनएस विक्रांत को सौंपने का। दिनभर दुकानदारी करने के बाद वह जब शाम को अपनी घास-फूस से बनी झोपड़ी में पहुंचा तो टीवी पर देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक जहाज आईएनएस विक्रांत को देखा। उसके साथ नौसेना के नए प्रतीक के अनावरण का रिमोट कंट्रोल पीएम मोदी के हाथ में अपने इंजीनियर बेटे को देखते ही पिता की आंखों से आंसू निकल आए। ये आंसू थे खुशी के। बेटे की इस उपलब्धि को देखकर गरीब पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसका बेटा प्रधानमंत्री के साथ खड़ा दिखाई देगा।

प्रधानमंत्री मोदी को विक्रांत का रिमोट सौंपने वाला नौ सेना का अफसर सचिन है जो कि हरदोई जिले का रहने वाला है। उसके पिता बेचेलाल चौरसिया बेहंदर क्षेत्र के बघुवामऊ गांव में चाट-पकौड़ी बेचकर अपने घर का खर्चा चलाते हैं। बेचेलाल ने बताया कि अभी दो वर्ष पहले साढ़े 17 साल की उम्र में भारतीय नौसेना में सचिन चौरसिया का मैकेनिकल ब्रांच में इंजीनियर पद पर चयन हुआ था।

शुक्रवार को देश के पीएम नरेंद्र मोदी केरल के कोच्चि में नौसेना को अपना पहला स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को देश के नाम समर्पित कर रहे थे इस मौके पर नौसेना के नए प्रतीत चिन्ह का भी अनावरण कर रहे थे। इन दोनों कार्यक्रमों का अनावरण जिस रिमोट कंट्रोल से किया गया उसे हरदोई जिले के बेंहदर इलाके के बघुवामऊ गांव का रहने वाला बेचेलाल चौरसिया का पुत्र इंजीनियर सचिन कुमार चौरसिया ने प्रधानमंत्री के हाथों में सौंपा। उन्होंने कहा कि मैंने सब कुछ अपने बेटे के भविष्य के लिए कुर्बान किया। कड़ी मेहनत और लगन से एक-एक पाई जोड़ अपने बेटे पर खर्च किया। मेरे खून पसीना की कमाई को मेरे बेटे ने सफल कर दिखाया है। आज सचिन चौरसिया की सफलता पर उसके पिता ही नहीं पूरे क्षेत्र को गर्व है।

चाट-समोसा से कमाई कर बेटों का संवारा भविष्य

गांव से करीब दो किलोमीटर दूर संडीला गौसगंज मार्ग पर अलावलपुर गांव के पास झोपडी बनाकर करीब पंद्रह वर्षों से चाट समोसा बेंचते बेंचेलाल का सबसे बड़ा बेटा राजकमल चौरसिया फार्मासिस्ट, उससे छोटा शुभम चौरसिया केजीएमयू अर्थों विभाग में पैरा मेडिकल  स्टॉफ में कार्यरत है। सबसे छोटा सचिन चौरसिया को भारतीय नौसेना में इंजीनियर पद पर है।

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