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Sunday, November 27, 2022
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घोटाला : अनट्रेंड हाथों में थी आयुष कॉलेजों में दाखिले की कमान, ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा

आयुष मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की जिम्मेदारी अनट्रेंड हाथों में थी। काउंसलिंग बोर्ड में आईटी का कोई एक्सपर्ट नहीं था बल्कि आयुर्वेदिक, यूनानी तथा होम्योपैथी के एक-एक चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल किए गए थे। निदेशालय में तैनात प्रभारी अधिकारी (शिक्षा) डॉ. उमाकांत काउंसलिंग बोर्ड के प्रभारी बनाए गए। आयुष विभाग के पास कोई आईटी सेल न होने के कारण निजी संस्था वी-थ्री सॉफ्ट सॉल्यूशन को काम दिया गया। एजेंसी का चयन अपट्रान के जरिए किया गया।

काउंसलिंग बोर्ड में निदेशालय के प्रभारी अधिकारी (शिक्षा) डॉ. उमाकांत, प्रभारी अधिकारी यूनानी प्रो. विजय कुमार पुष्कर, संयुक्त निदेशक होम्योपैथी डॉ. वसीम को शामिल किया गया था। इन्हीं तीनों शिक्षाधिकारियों की निगरानी में काउंसलिंग हुई थी। आईटी एजेंसी वी-3 सॉफ्ट सॉल्यूशन के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह को काउंसलिंग बोर्ड ने नीट मेरिट सूची की हार्ड डिस्क सौंप दी। ऑनलाइन काउंसलिंग में छात्रों के रजिस्ट्रेशन, डाटा कैप्चर, फोटो अपलोड, शुल्क भुगतान, मेरिट सूची, सीट आवंटन, छात्रों को बुलाने की जिम्मेदारी निजी एजेंसी की थी। आरोप है कि निजी एजेंसी ने डीजीएमई कार्यालय से मिले डाटा में छेड़छाड़ करते हुए फर्जी ऑनलाइन काउंसलिंग करा दी। 

निजी एजेंसी पर निर्भर था काउंसलिंग बोर्ड
कंप्यूटर के जानकार न होने के कारण बोर्ड में शामिल तीनों डॉक्टर निजी एजेंसी पर ही निर्भर थे। वेंडर जैसा कहता गया वैसे डॉक्टर भी करते गए। किसी एडमिशन को क्रास चेक करने की कोशिश नहीं की गई। दरअसल काउसलिंग बोर्ड को निजी एजेंसी के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह ने समझा दिया था कि नीट की वेबसाइट और सूची से छेड़छाड़ असंभव है। यदि किसी नीट मेरिट संशोधित करके किसी छात्र को पास किया जाएगा तो डाटाबेस का क्रम बिगड़ जाएगा। इसलिए ऐसा संभव नहीं है। काउंसलिंग बोर्ड ने कुलदीप की इन्हीं बातों पर भरोसा किया और जैसा कहा वैसे करते गए। 
फोन उठाना बंद किया तो माथा ठनका
गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद आयुर्वेद निदेशालय ने निजी एजेंसी के वेंडर कुलदीप सिंह को तलब किया। आरोप है कि उसने निदेशालय में सुरक्षित हार्ड डिस्क यह कहते हुए ले ली कि अपने लैपटॉप से मिलान करेगा। अगले दिन कुलदीप लापता हो गया। उसने काउंसलिंग प्रभारी डॉ. उमाकांत का फोन भी रिसीव करना बंद कर दिया। कई बार फोन करने पर भी रिसीव नहीं हुआ तो टीम उसके घर व दफ्तर पर भेजी गई। वहां भी कुलदीप नहीं मिला और यह भी नहीं पता चला कि कहां गया है। इसके बाद संदेह गहरा हो गया। इस संबंध में आयुर्वेद निदेशक प्रो. एसएन सिंह, काउंसलिंग बोर्ड प्रभारी डॉ. उमाकांत से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। डॉ. उमाकांत ने मैसेज का भी जवाब नहीं दिया।

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