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Monday, January 24, 2022
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ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रखना बैंकों की जिम्मेदारी…जज के खाते से रकम गायब होने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज (अवकाश प्राप्त) के बैंक खाते से लाखों रुपये की रकम उड़ा देने वाले साइबर अपराधियों की जमानत नामंजूर करते हुए कहा है कि बैंक में रखे ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंकों की है। बैंक अपनी जवाबदेही से मुकर नहीं सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंकों को खाता धारकों का पैसा सुरक्षित रखना चाहिए। केवल इसलिए नहीं कि ग्राहक पैसा बैंक में जमा करता है ताकि वक्त पर निकाल सके, बल्कि इसलिए भी क्योंकि बैंक में जमा पैसा एक नंबर का होता है जिससे देश की आर्थिक ‌स्थिति सुधरती है।

कोर्ट ने कहा कि देश में ऐसे भी लोग हैं जो करोड़ों की रकम बैंक में नहीं बल्कि तहखानों और तिजोरियों में रखते हैं। इससे न तो बैंक को कोई लाभ होता है और न देश को। बैंक का ग्राहक देश के प्रति ज्यादा ईमानदार होता है। किसी प्रकार से साइबर अपराधियों द्वारा ग्राहक के खाते में डाका डाला जाता है तो बैंक को ही इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। जज के खाते से रकम उड़ाने पर यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने झारखंड के नीरज मंडल उर्फ राकेश, तपन मंडल, शूबो शाह उर्फ सुभाजीत और तौसीफ खां की जमानत नामंजूर करते हुए दिया है। जमानत प्रार्थनापत्र के पक्ष और विरोध में वकीलों ने अपने तर्क रखे।

साथ ही साइबर अपराध को रोकने के लिए सुझाव दिए। सभी का एक ही मत था कि साइबर अपराध जिस तरह बढ़ रहा है और बैंक व पुलिस दोनों ही लाचारी दिखाते हैं, इसे बंद होना चाहिए। बैंकों को ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। नियमों में इस प्रकार से संशोधन किया जाए कि फर्जी खाता खुलवाने और फर्जी सिमकार्ड आदि हासिल करना आसान न हो, जिससे साइबर अपराध पर रोक लग सके।

यह है मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति पूनम श्रीवास्तव ने प्रयागराज के कैंट थाने में आठ दिसंबर 2020 को एफआईआर दर्ज कराई थी कि चार दिसंबर 2020 को उनके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम एसएन मिश्र बताया और खुद को बैंक का कर्मचारी बताकर उनका आधार कार्ड, पास बुक और पैन नंबर की जानकारी मांगी। यह सभी प्राप्त करने के बाद उनके खाते से लगभग पांच लाख रुपये की रकम उड़ा ‌दी गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की तो झारखंड के राजू रंजन, नीरज कुमार मंडल, तपन कुमार मंडल का नाम सामने आया। ये लोग फर्जी आईडी पर सिम कार्ड हासिल कर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाया करते थे। राजीव रंजन ग्रामीण बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र भी चलाता था। इन लोगों से पूछताछ में अन्य अभियुक्तों के नाम भी सामने आए। अभियुक्तों ने पेटीएम वॉलेट का इस्तेमाल कर न्यायमूर्ति श्रीवास्तव के खाते से रकम उड़ाई थी। वह रकम बरामद कर उन्हें लौटा दी गई।

ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा पर दिए गए तर्क-वितर्क

अभियुक्तों की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अलावा केंद्र सरकार के अपर सॉलिसिटर जनरल एसपी सिंह, अपर महाधिवक्ता महेश चतुर्वेदी, रिजर्व बैंक के अधिवक्ता विकास बुधवार( अब न्यायमूर्ति), शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार पाल, भारतीय दूर संचार की ओर से अधिवक्ता रवि रंजन आदि उपस्थित हुए। अधिवक्ताओं का मत था कि गरीब ग्राहकों का पैसा जब साइबर ठग बैंक से उड़ा देते हैं तो उस ग्राहक की न तो बैंक सुनता है और न पुलिस। बैंक कहता है कि ग्राहक की गलती से रकम गई जबकि पुलिस कहती है कि अभियुक्त नक्सली इलाकों में है और उनकी पहुंच से दूर हैं। दूसरी तरफ अभियुक्तों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता का कहना था कि इस मामले में बैंकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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