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Friday, December 2, 2022
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आयुष घोटाले में 22 अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ मिले साबूत,ऐसे किया डाटा में हेरफेर

आयुष निदेशालय और काउंसलिंग करने के लिए अधिकृत एजेन्सी अपट्रॉन व वी-थ्री सॉफ्ट सॉल्यूशन के 22 अधिकारी व कर्मचारियों को एसटीएफ की पड़ताल में दोषी पाया गया है। इनके खिलाफ साक्ष्य भी मिल गये हैं। नीट की मूल मेरिट और काउंसलिंग में इस्तेमाल डॉटा बेमेल पाया गया था। बावजूद इसके कई अफसर जानकर अनजान बने रहे थे। किस तरह से डाटा में हेरफेर किया गया और वास्तविक अभ्यर्थियों को आउट कर दिया गया। इस बारे में भी कई तथ्य हाथ लगे हैं। पांच दिन में एसटीएफ मुख्यालय में डॉटा मिलान और कई अफसरों-कर्मचारियों के बयान सुबूत में अहम कड़ी बने। अब एसटीएफ दोषी मिले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करने से पहले विधिक राय लेने की बात कह रही है। 

एसटीएफ ने इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे पहले निदेशालय के डायरेक्टर डॉ. एसएन सिंह से पूछताछ की थी। एसएन सिंह ने तीन दिन तक लगातार सवाल जवाब किये गये थे। इस बीच ही एसएन सिंह निलम्बित भी कर दिये गये। एसएन सिंह से कई तथ्य हाथ लगने के बाद एसटीएफ ने डॉटा खंगालने शुरू किये तो तफ्तीश उलझती गई। इस पर आईटी विशेषज्ञों को बुलाकर डॉटा का मिलान कराया गया। एसटीएफ की दो टीमें चार दिन तक दिनभर इसको लेकर ही मंथन करती रही। इससे कई सुबूत हाथ लगे। 

बाहरी कर्मचारियों को डाटा देने के सुबूत मिले
नीट मेरिट का डाटा जिम्मेदार अफसरों की मौजूदगी में बाहरी लोगों को भेजा जाता रहा और सब चुप रहे। काउंसलिंग के लिये बने बोर्ड के सदस्य भी लापरवाह बने रहे। इन तथ्यों के आधार पर ही पड़ताल बढ़ती रही। काउंसलिंग में शामिल आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ विशेषज्ञ भी थे। लेकिन ये सब बाहरी एजेन्सी के मोहरे की तरह काम करते रहे। इन बिन्दुओं पर लम्बी पड़ताल हुई और डॉटा से कई जानकारी मिलने पर गड़बड़ियों का उदगम पता चलता गया।

तथ्यों की पुष्टि के लिए फुटेज खंगाले गए

एसटीएफ दो दिन पहले देर शाम अचानक गोमतीनगर स्थित राजकीय होम्योपैथिक कालेज पहुंची थी। यही पर आयुष दाखिले के लिये काउंसलिंग की गई थी। यहां दो कमरों में दस्तावेज रखे गये थे। इन दस्तावेजों को देखा गया। यहां कुछ सुबूत मिले जिसके आधार पर शनिवार को एसटीएफ ने अचानक निलम्बित निदेशक डॉ. एसएन सिंह को बुलाया और उन्हें लेकर आयुर्वेद निदेशालय पहुंची। यहां सीसी फुटेज खंगाले। इसके साथ ही बी-थ्री एजेन्सी के कर्मचारी कुलदीप सिंह के परिवारीजनों से कई घंटे पूछताछ हुई। इसमें भी कई बिन्दु मिलने पर एसटीएफ ने सरकारी व निजी कम्पनी के 22 कर्मचारियों की सूची तैयार की। इनमें कुछ लोग सीधे तौर पर लापरवाही और गड़बड़ी के दोषी मिले हैं। साथ ही कुछ कर्मचारियों को फर्जीवाड़े के बारे में नहीं पता था लेकिन वह जो काम कर रहे थे, उसके नियम विपरीत होने की जानकारी हो गई थी फिर भी सब चुप रहे। 

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