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Saturday, January 22, 2022
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आपकी ज्‍वेलरी कितनी सच्‍ची, हॉलमार्किंग के छह नंबर खोल देंगे पूरी कुंडली

ज्‍वेलरी की क्वालिटी को लेकर धोखाधड़ी अब गुजरे जमाने की बात होगी। बस आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपने हॉलमार्किंग वाला आभूषण खरीदा है। आभूषण पर दर्ज छह नंबरों को बीआईएस केयर एप पर डालकर आभूषण की कुंडली जानी जा सकती है। लेकिन मुश्किल यह है कि गोरखपुर में 5000 से अधिक ज्वैलर्स में से सिर्फ 297 ने हॉलमार्किंग में रजिस्ट्रेशन कराया है।

पहली दिसम्बर से हॉलमार्किंग वाले ही आभूषणों की बिक्री हो सकती है। लेकिन अभी भी 90 फीसदी से अधिक दुकानदार बिना हॉलमार्किंग वाला आभूषण बेच रहे हैं। इन आभूषणों की गुणवत्ता हमेशा संदेह में होती है। गांव-कस्बों के ज्वैलर्स अपने ग्राहकों को समझा रहे हैं कि हॉलमार्किंग वाले आभूषण महंगे होंगे। जिसमें ग्रामीण इलाकों के साथ हजारों ग्राहक फंस जा रहे हैं।

लोग हॉलमार्किंग वाले आभूषण खरीदें इसके लिए सरकार की तरफ से बीआईएस केयर एप लांच किया गया है। पहली जनवरी को लांच इस एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। एप पर आभूषणों पर दर्ज 6 डिजिट के नंबरों को डालकर पूरा ब्यौरा हासिल किया जा सकता है। इससे पता चल जाएगा कि आभूषण की हालमार्किंग किस सेंटर से हुई है। आभूषण किस तारीख को बना है। किस ज्वैलर्स ने बेचा है। कितने कैरेट का आभूषण है। आशीर्वाद हॉलमार्किंग सेंटर के सोनू ने बताया कि हालमार्किंग वाले जेवर को लेकर सबसे अच्छी बात यह है कि ग्राहकों को जरूरत पर बिक्री करने पर अच्छा रिटर्न मिलेगा। कोई भी दुकान वाला यह कहने की स्थिति में नहीं होगा कि इसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है।

देश में 1.24 करोड़ आभूषणों की हो चुकी है हॉलमार्किंग

बीआईएस की वेबसाइट पर दर्ज है कि पूरे देश में 1.24 करोड़ आभूषणों की हालमार्किंग हो चुकी है। गोरखपुर में हॉलमार्किंग सेंटर चलाने वाले महेश वर्मा का कहना है कि गोरखपुर में रोज 300 से 500 आभूषणों की हॉलमार्किंग हो रही है। लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। बता दें कि गोरखपुर में 5000 से अधिक ज्वैलर्स जीएसटी दाखिल करते हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 297 ने ही हॉलमार्किंग में पंजीकरण कराया है। आभूषण कारोबारी पुनीत वर्मा का कहना है कि हॉलमार्किंग का पंजीकरण भले ही अपेक्षाकृत कम हो लेकिन हकीकत यह है कि 60 फीसदी आभूषणों की बिक्री पंजीकृत 297 दुकानदारों द्वारा ही की जाती है।

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