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Friday, December 2, 2022
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अपने ही बुने जाल में फसता जा रहा है दानिश, मनगढंत निकाह के लिए ढूंढे नही मिल रहे हैं गवाह

गवई सियासत में फसी हबीबा को न्याय की दरकार

चुनाव के दरमियान नाबालिक लड़कियों की जन्मतिथि में किया गया खेल

वोट पाने के लिए चुनाव आयोग को भी दी गई चुनौती


अम्बेडकरनगर। उम्मे हबीबा, यह नाम इस समय सुर्खियों में हैं इस नाम के सुर्खियों में आने का कारण बस इतना है इसकी जन्मतिथि में सियासतदरों ने बड़े पैमाने पर हेराफेरी करते हुए उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी। उधर पिता इब्राहिम बेग ने दानिश बेग व उसके घर वालों के विरुद्ध उनकी बेटी को शारीरिक व मांसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप में थाने में मुकदमा पजीकृत कराया है। कोर्ट ने दानिश से निकाह को प्रमाणित करने वाले सबूत को मांगते हैं कुछ शर्तों पर जमानत दी थी। अगली तारीख आगामी सोमवार को है अगर कोई प्रमाण वह पेश नही कर पाया तो उसे जेल भेजा जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ दानिश व उसके परिजन लोगों से निवेदन करते नज़र आ रहे हैं कि कोई उनकी निकाह को लेकर कोर्ट में गवाही दे। वही जन्म तिथि को लेकर भी काफ़ी असमंजस की स्थिति रही लेकिन इसके पीछे का राज गवई सियासत सामने आई।
मामला टांडा तहसील क्षेत्र के अलनपुर गांव का है जहां पर बड़े पैमाने पर महज चुनाव जीतने के लिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने हेतु पटकथा रची जाती है यहां के सियासतदारों के घर में शादियां भी चुनाव के समय में अधिकतर रूप से होती है। सूत्र बताते हैं कि बीते पंचवर्षीय कार्यकाल में चुनाव के दौरान निवर्तमान ग्राम प्रधान ने बड़े पैमाने पर नाबालिक लड़कियों को आधार कार्ड में बालिक दिखाकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाया था। जिसमें से एक नाम उम्मे हबीबा भी है जिसकी जन्मतिथि वर्ष 2001 थी लेकिन भ्रामक दस्तावेजों को पेश कर सियासतदारों ने आधार कार्ड एजेंसी के कर्मचारी को प्रभाव में लेते हुए जन्मतिथि में बड़े पैमाने पर हेर फेर करवा दिया और जन्मतिथि वर्ष 1993 दर्ज करा दिया गया। 2015 के पंचायत चुनाव में उम्मे हबीबा नाबालिक थी लेकिन आधार कार्ड में उसे बालिक दिखाकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा दिया गया। इस बात की पोल तो तब खुली जब मामला उम्मे हबीबा की कथित निकाह की बात सामने आई। ऐसा बताया जा रहा है कि इस पूरे कार्य में गांव का ही दानिश बेग पुत्र हैदर शामिल रहा जिसे सियासतदारों ने आवास का लालच दिया हालांकि चुनाव जीतने के बाद दानिश के मां को आवास मुहैया करवाया गया। उम्मे हबीबा सियासतदारों की सियासत के शिकार में फसी पहली लड़की नहीं है गांव में अन्य भी लड़कियां हैं जो 2015 के चुनाव में नाबालिक थी लेकिन आधार कार्ड में उन्हे बालिक बनाया गया। हालांकि यह पूरी बातें चर्चा का अंश भले ही है लेकिन इसमें कहीं न कहीं सच्चाई भी झलक रही है और मामले की गहनता से जांच होना भी अति आवश्यक है। प्रशासन को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच करानी चाहिए क्योंकि यहां शासन और प्रशासन को गुमराह करने का कार्य किया गया है साथ ही उन्हें चुनौती भी दी गई है। हेरा फेरी करने के आगे इतना इल्म नही था कि मां और बेटी के उम्र के बीच का फासला उन्हे फसा देगा। उम्मे हबीबा की माता का जन्म वर्ष 1982 में हुआ लेकिन इन सियासतदारों ने 2001 में पैदा हुई उम्मे हबीबा का जन्म वर्ष 1993 दर्ज करवाते हुए वोटर बना दिया। उम्मे हबीबा के पिता इब्राहिम बेग ने बताया कि मैं रोजी रोटी हेतु मुंबई रहता हूँ गाँव की सियासत ने मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी,बेटी उम्मे हबीबा के उम्र में हेरफेर दानिश बेग और सफ़ात बेग ने किया है। यह भी कहा कि जब इस बात की जानकारी हुई तो आधार कार्ड में जन्म तिथि को दुरुस्त कराया। वहीं कथित रूप से दानिश ने उम्मे हबीबा से निकाह किया लेकिन पिता का कहना कि यह सिर्फ प्रशासन को भटकाने की एक साजिश दानिश व उसके सहयोगियों द्वारा किया गया है। दानिश की शादी किसी अन्य युवती के साथ हुई है जो अभी कथित रूप से उसके घर रह रही है।

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